नीतीश की जुबान फिसली: राबड़ी देवी को बता दिया लालू की ‘बेटी’

Ajay Gupta
Ajay Gupta

राजनीति में भाषण अक्सर रणनीति से लिखे जाते हैं. लेकिन कभी-कभी एक शब्द पूरा राजनीतिक माहौल बदल देता है.

बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar की अररिया रैली में भी कुछ ऐसा ही हुआ. विकास योजनाओं पर बोलते-बोलते अचानक उनकी जुबान फिसली…और उन्होंने Rabri Devi को Lalu Prasad Yadav की “बेटी” कह दिया.

बस फिर क्या था. राजनीतिक गलियारों में यह एक वाक्य तुरंत चर्चा का विषय बन गया.

अररिया की सभा और विकास का एजेंडा

बिहार में अपनी समृद्धि यात्रा के दूसरे दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अररिया पहुंचे. यहां उन्होंने कई विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. सभा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे और मंच से सरकार की योजनाओं का ब्योरा दिया जा रहा था.

नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार लगातार विकास और जनकल्याण के कार्य कर रही है. उन्होंने सड़क, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यक्रमों का भी जिक्र किया.

लेकिन भाषण का सबसे ज्यादा चर्चित हिस्सा विकास नहीं बल्कि एक वाक्य बन गया.

जब मंच से फिसल गई जुबान

जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री विपक्ष पर हमला कर रहे थे. इसी दौरान उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का नाम लिया.

और तभी एक ऐसा शब्द निकल गया जिसने लोगों को चौंका दिया. नीतीश कुमार ने राबड़ी देवी को लालू यादव की “बेटी” कह दिया. राजनीतिक संदर्भ में यह गलती छोटी लग सकती है, लेकिन मंच पर मौजूद लोगों के बीच हल्की हलचल जरूर दिखी. कुछ लोगों ने इसे तुरंत नोटिस किया, जबकि कई लोगों को कुछ सेकंड बाद समझ आया कि बयान में गड़बड़ी हो गई है.

विपक्ष को मिल गया नया मुद्दा

राजनीति में शब्द सिर्फ शब्द नहीं होते, वे अक्सर हथियार बन जाते हैं. इस बयान के सामने आते ही विपक्षी दलों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए. कुछ नेताओं का कहना है कि इतने अनुभवी नेता से इस तरह की गलती चौंकाने वाली है. वहीं सत्तारूढ़ खेमे के कई लोग इसे सामान्य “slip of tongue” बता रहे हैं.

राजनीतिक विश्लेषक सुरेंद्र दुबे का कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर लंबे भाषण के दौरान ऐसी घटनाएं हो जाती हैं. लेकिन सोशल मीडिया के दौर में हर शब्द हर वाक्य और हर गलती मिनटों में वायरल हो जाती है.

महिला सशक्तिकरण पर भी दिया बयान

अपने संबोधन में नीतीश कुमार ने कहा कि पहले की सरकारों में महिलाओं के लिए पर्याप्त काम नहीं हुआ था. उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार बनने के बाद महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई अहम फैसले लिए गए. सरकारी नौकरियों में आरक्षण से लेकर नगर निकाय चुनावों में प्रतिनिधित्व तक महिलाओं को अवसर देने की कोशिश की गई.

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में महिला सशक्तिकरण सरकार की प्राथमिकता है. हालांकि इस पूरे भाषण के बाद चर्चा का केंद्र वही एक वाक्य बन गया जिसने राजनीतिक बहस को नई दिशा दे दी.

गलती या सिर्फ एक क्षणिक चूक?

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक साधारण जुबान फिसलने की घटना थी? या फिर इस बयान को राजनीतिक चश्मे से देखने की कोशिश हो रही है? राजनीति में कई बार एक छोटी सी बात भी बड़े विमर्श में बदल जाती है. अररिया की इस सभा के बाद फिलहाल बिहार की राजनीति में वही चर्चा गूंज रही है.

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