बिहार: जवन दिखे ला, ऊ होता नइखे… आ जवन होता, ऊ नीतीश करेला

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

बिहार के राजनीति कबो सीधी राह पर ना चले। इहां जवन बाहर से देखाई देला, ऊ अक्सर भ्रम साबित होखेला आ जवन असल में सत्ता के अंदरखाने चल रहल होखे, ओकर अंदाजा लगावल हर कवनो के बस के बात नइखे। इहे वजह बा कि बिहार के सत्ता हर दौर में सुर्खी में रहेली। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के ऊ पुरान तंज आज फिर से ताजा हो गइल बा, जब ऊ संसद में हंसत-हंसत कहलन रहलन—“नीतीश कुमार के पेट में दांत बा।” आज के राजनीतिक हालात ऊ तंज के हर लाइन के सही साबित कर रहल बा।

चुनाव जीत BJP के, खेल नीतीश के

विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा खेमा में जश्न के माहौल रहे। कार्यकर्ता आ नेता लोग मान के चल रहल रहल कि अब सरकार में असली दबदबा उनका होई। लेकिन इहे मौका पर नीतीश कुमार चुपचाप आपन चाल चल दिहलन। मंत्रिमंडल बंटवारा के समय जदयू आ भाजपा के बीच जब रस्साकशी चल रहल रहे, तभी नीतीश बिना हल्ला-शोर के तीन नया विभाग बना के पूरा सत्ता समीकरण ही पलट दिहलन। एह चाल से साफ हो गइल कि मंत्री कौन होई, एहसे जादे जरूरी बा कि सिस्टम के रिमोट किसके हाथ में बा।

Civil Aviation: Power Centre CM Office में

सबसे चौंकावे वाला फैसला रहल कि नीतीश कुमार Civil Aviation जइसन रसूखदार आ भविष्य से जुड़ल विभाग खुद रख लिहलन। ई खाली नाम के मंत्रालय नइखे, बल्कि कनेक्टिविटी, निवेश आ विकास से सीधा जुड़ल बा। एहसे स्पष्ट संकेत गइल कि नीति निर्धारण, प्लानिंग आ बड़े फैसले मुख्यमंत्री कार्यालय से ही निकलिहें। सत्ता के असली चेहरा नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द ही घूमे—ई बात ऊ बहुत शांति से स्थापित कर दिहलन।

शिक्षा पर नीतीश के पकड़, BJP बाहर

शिक्षा मोर्चा पर भी नीतीश कुमार आपन पकड़ अउरी मजबूत क लिहलन। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार के Higher Education के अतिरिक्त जिम्मेदारी दे के नीतीश साफ कर दिहलन कि कॉलेज, यूनिवर्सिटी आ छात्र राजनीति पर नियंत्रण अबहियों जदयू आ मुख्यमंत्री के पास ही रही। शिक्षा जइसन वैचारिक आ संवेदनशील विभाग पर पकड़ बना के नीतीश लंबा राजनीतिक खेल खेल रहल बाड़े।

Employment BJP के खाते में, गुस्सा भी साथे

भाजपा के हिस्सा में Employment & Skill Development विभाग आइल। ई विभाग सीधे बेरोजगारी आ युवा असंतोष से जुड़ल बा। नौकरी मिली त सरकार के तारीफ, लेकिन अगर मौका ना मिलल त सीधा उंगली भाजपा पर उठी। राजनीतिक जानकार मानत बाड़े कि ई विभाग भाजपा खातिर अवसर से जादे चुनौती बन सकेला।

जनता के नाराजगी वाला मंत्रालय BJP के जिम्मे

नीतीश कुमार के सबसे शातिर चाल तब सामने आइल, जब ऊ जनता के रोजमर्रा के गुस्सा से जुड़ल विभाग भाजपा के दे दिहलन। Health DepartmentRevenue & Land Reforms हमेशा विवाद में रहल बा। अस्पताल के बदहाली, दवाई के कमी, जमीन विवाद आ दाखिल-खारिज—ई सब समस्या आम आदमी के सबसे जादे परेशान करेली। अब हर शिकायत आ हर नाराजगी सीधा भाजपा के मंत्री के खिलाफ जाई।

गृह विभाग: ताला BJP के, चाबी नीतीश के

भाजपा नेता लोग खुश बा कि 20 साल बाद गृह विभाग मिलल। लेकिन प्रशासनिक जानकार बतावत बाड़े कि असली ताकत General Administration में होखेला, जवन नीतीश कुमार खुद रख लिहलन। IAS अफसरन के पोस्टिंग, ट्रांसफर, प्रमोशन आ नयी नियुक्ति—सब एह विभाग के अधीन आवेला। मतलब साफ बा—पुलिस भले भाजपा के अधीन दिखे, लेकिन सिस्टम नीतीश के इशारे पर ही चलेला।

सचिवों के जरिए रिमोट कंट्रोल मॉडल

नीतीश कुमार के शासन स्टाइल में सचिवन के भूमिका हमेशा से अहम रहल बा। ऊ मंत्री से जादे भरोसा अफसरशाही पर करत बाड़े। पिछला कार्यकाल में भी भाजपा के मंत्री शिकायत करत रहलन कि सचिव सीधा मुख्यमंत्री से रिपोर्ट करेला। एह बार भी वैसा ही माहौल बन रहल बा।

लालू परिवार पर इतिहासिक झटका

एह पूरा सत्ता खेल के बीच लालू प्रसाद यादव आ उनका परिवार खातिर समय बेहद कठिन साबित हो रहल बा। राजद के सीट 75 से घट के 25 रह गइल। एह हार के बाद अब 10 Circular Road वाला बंगला भी खाली करावे के नौबत आ गइल। ई खाली मकान खाली होखे के मामला नइखे, बल्कि बिहार के राजनीति में एक पूरे दौर के खत्म होखे के संकेत बा।

सरकार BJP-JDU के, सिस्टम नीतीश के

पूरा तस्वीर साफ बा—बिहार में सरकार भले भाजपा-जदयू के हो, लेकिन सिस्टम के डोर नीतीश कुमार के हाथे में बा। विवादित आ मुश्किल विभाग भाजपा के जिम्मे बा, जबकि नीति, प्रशासन आ नियंत्रण वाला मंत्रालय मुख्यमंत्री के पास सुरक्षित बा।
 इहे कारण बा कि बिहार में कहल जाला— “इहां सरकार जीत से ना, चाल से चलावल जाला।”

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