
छत्तीसगढ़ शासन ने बस्तर के अबूझमाड़ इलाके में एक “अबूझी” परियोजना को “बुझा” दिया है! कुतुल से महाराष्ट्र की सीमा नीलांगुर तक 21.5 किमी टू-लेन पेव्ड शोल्डर सड़क के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
₹152 करोड़ की न्यूनतम टेंडर दर को मंजूरी मिल गई है। अब बचा है तो बस – “सड़क पर चलने का” इंतजार।
विकास की सड़क या सियासी शॉर्टकट?
सरकार कह रही है – ये सड़क नहीं, “सपनों का सिक्स लेन रास्ता” है। लेकिन विपक्ष बोले – “कहीं चुनाव से पहले वाली कंक्रीट पॉलिटिक्स तो नहीं?” बहरहाल, 21.5 किलोमीटर की ये स्ट्रेच अब बस्तर से महाराष्ट्र तक “ऑन-रोड रिलेशनशिप” बनाने वाली है।
अबूझमाड़: जहां पहले GPS भी मना करता था!
अबूझमाड़ – वो इलाका जहां अब तक इंटरनेट हकलाता था, मोबाइल सिग्नल गायब रहता था, और रास्ते पूछने पर लोग कहते थे – “भाई, न जाओ उधर!”
लेकिन अब, NH-130D बोलेगा – “Turn right towards Development Lane.”
NH-130D: सिर्फ राजमार्ग नहीं, ‘राष्ट्रमार्ग’
NH-130D, जिसकी कुल लंबाई है 195 किमी, छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव से नारायणपुर, कुतुल, फिर महाराष्ट्र के आलापल्ली तक जाता है और जुड़ता है NH-353D से।
इस रोड पर अब होंगे टूरिज्म के ट्रक, सुरक्षा के सायरन, व्यापार के वैगन और शायद कुछ नेता भी, जो सड़क देखकर वादा याद कर लें।
152 करोड़ की मंजूरी – “विकास अब बैल नहीं, बुलडोज़र पर सवार है”
तीन खंडों में बनने वाली इस सड़क पर जो टेंडर सबसे सस्ता निकला, उसे “Construction का कांसी फिनिशिंग” देने के निर्देश भी दे दिए गए हैं।
लोक निर्माण विभाग ने आदेश निकाल दिया है –

“जैसा वादा, वैसा ठेका!”
नक्सल इलाकों में सुकून की सड़क?
सरकार का दावा है कि यह रोड केवल गाड़ियों की नहीं, बल्कि “गांव से बदलाव” की गवाही बनेगी। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में जब पहली बार बुलेटप्रूफ रोड के बदले पक्की सड़क मिलेगी, तो शायद लोग कहेंगे –
“अबूझमाड़ अब अबूझ नहीं रहा।”
“रास्ता साफ़ है, अब केवल विकास आना बाकी है”
इस सड़क से न सिर्फ बस्तर को महाराष्ट्र से सीधा जोड़ा जाएगा, बल्कि सुरक्षा बलों, व्यापारियों और ट्रैवलर्स के लिए यह “सड़क से सीधा संवाद” की तरह होगा। और हाँ, इस बार सड़क पर “खड्डा” नहीं होगा, बल्कि “क्लियरेंस” होगा – वो भी फॉरेस्ट वाला!
NH-130D, अबूझमाड़ से आलापल्ली की ओर विकास की नई धड़कन है। ये सड़क न केवल छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र को जोड़ेगी, बल्कि “भूगोल को इतिहास से जोड़ने” का काम करेगी। सरकार कहती है – “सड़क से विकास आता है” और जनता पूछ रही है – “सड़क कब पूरी होगी?”
“जात भी देखी, जज्बा भी, और भोजपुरी तड़का भी!” – पीके की रेसिपी तैयार!
