
देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल एंट्रेंस परीक्षाओं में गिनी जाने वाली NEET PG 2025 एक बार फिर विवादों में है। इस बार मामला इतना चौंकाने वाला है कि मेडिकल सर्कल से लेकर सोशल मीडिया तक बहस छिड़ गई है।
तमिलनाडु की तीसरे राउंड की काउंसलिंग में 800 में से महज़ 9 अंक पाने वाले एक उम्मीदवार को प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में MD सीट अलॉट कर दी गई वह भी मैनेजमेंट कोटे के तहत।
अब सवाल उठना लाज़मी है क्या यह मेरिट है या सिर्फ मैनेजमेंट?
9 नंबर में PG सीट: कैसे हुआ ये संभव?
तीसरे राउंड की काउंसलिंग के दौरान पेरम्बलुर स्थित एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में MD फार्माकोलॉजी की सीट 9 अंकों पर अलॉट हुई। वहीं 25 नंबर लाने वाले एक अन्य उम्मीदवार को MD कम्युनिटी मेडिसिन की सीट मिल गई। कुल मिलाकर 21 ऐसे उम्मीदवारों को PG सीटें मिलीं, जिनके अंक 100 से कम थे।
कटऑफ पहले ही घटाया जा चुका था, लेकिन यह गिरावट अब मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
Cutoff में ऐतिहासिक गिरावट
नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने 2025-26 सत्र के लिए कटऑफ घटाकर 800 में से 103 कर दिया।
आरक्षित वर्ग के लिए क्वालीफाइंग स्कोर -40 तक पहुंच गया। मतलब माइनस मार्क्स लाने वाले उम्मीदवार भी PG में एडमिशन के योग्य!
यह फैसला 9,000 से ज्यादा खाली सीटों के चलते लिया गया था। “सीट भरने की जल्दी में क्या सिस्टम की साख दांव पर लग गई?”

IMA और डॉक्टरों की नाराजगी
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) समेत कई वरिष्ठ डॉक्टरों ने इसे गलत प्रैक्टिस बताया है। उनका कहना है कि मेडिकल शिक्षा में क्वालिटी से समझौता भविष्य के मरीजों के लिए खतरा बन सकता है।
मामला अब सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है, जिससे यह विवाद और तूल पकड़ सकता है।
NEET PG Exam Pattern एक नजर में
- कुल प्रश्न: 200 MCQs
- कुल समय: 3.5 घंटे
- हर सही जवाब: +4 अंक
- गलत जवाब: -1 अंक
- कुल अंक: 800
हर साल लाखों MBBS ग्रेजुएट इस परीक्षा को देते हैं, ताकि MD, MS और PG डिप्लोमा में दाखिला पा सकें।
बड़ा सवाल: मेरिट vs मैनेजमेंट?
कटऑफ गिराने का तर्क सीटें भरना हो सकता है, लेकिन 9 अंक पर PG सीट अलॉट होना मेडिकल सिस्टम के लिए चेतावनी जैसा है।
सिस्टम कहता है — “सीट खाली नहीं रहनी चाहिए।”
जनता पूछती है — “लेकिन सीट पर कौन बैठेगा?”
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