
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के उत्तरी उपनगर मलाड से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ फल विक्रेता फलों को चूहों से बचाने के नाम पर उन पर जहरीला पदार्थ लगा रहे थे और फिर उन्हें बाजार में बेच रहे थे। शिकायत मिलते ही मलाड पुलिस स्टेशन की टीम हरकत में आई और दुकान को सील कर दिया गया।
शिकायत से खुला मामला
स्थानीय नागरिक कुणाल सालुंके ने लिखित शिकायत दर्ज कराई। आरोप था कि दो विक्रेता फलों पर रेटिनॉल नाम की दवा लगा रहे हैं, जिसे चूहा मारने की दवा बताया गया। बताया गया कि पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हुई, जिसका वीडियो पुलिस को सौंपा गया।
सवाल सीधा है, चूहों से बचाने के नाम पर इंसानों की सेहत दांव पर क्यों?
पुलिस की कार्रवाई
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे फलों को चूहों से बचाने के लिए दवा लगा रहे थे। पुलिस ने दो आरोपियों मनोज कुमार केसरवानी और बिपिन केसरवानी को गिरफ्तार किया है।
दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 125, 274, 275 और 286 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
कानून और सेहत का सवाल
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि खाद्य पदार्थों के साथ इस तरह की लापरवाही न केवल गैरकानूनी है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

फूड सेफ्टी का सवाल केवल नियमों का नहीं, भरोसे का भी है। जब ग्राहक फल खरीदता है, तो वह स्वाद के साथ सुरक्षा भी खरीदता है।
फल मीठे हों या खट्टे, जहर का स्वाद हर बार कड़वा ही होता है। यह मामला केवल दो दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बाजार तंत्र के लिए चेतावनी है।
पुलिस ने दुकान सील कर आगे की जांच शुरू कर दी है। यदि और तथ्य सामने आते हैं, तो संबंधित विभागों को भी कार्रवाई के लिए सूचित किया जाएगा।
अब देखना यह है कि क्या यह isolated incident था या बाजार में और भी ‘जहरीले’ सच छिपे हैं।
राजधानी में गोलियों की गूंज — Target पर Lawrence Bishnoi का वकील
