
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में शुक्रवार की सुनवाई के दौरान ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने कोर्ट से लेकर प्रशासन तक सभी को हिला दिया।
सुनवाई के दौरान एक बैन किया गया नायलॉन/चाइनीज मांझा कोर्ट के सामने पेश किया गया। जैसे ही जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने इसका परीक्षण किया और धागे को एक पेंसिल पर रगड़ा गया— पेंसिल आसानी से कट गई।
“अगर पेंसिल कट सकती है, तो इंसान?”
इस परीक्षण के बाद पीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “यदि एक ठोस पेंसिल इतनी आसानी से कट सकती है, तो मानव जीवन के लिए खतरे का अंदाज़ा अपने आप लगाया जा सकता है।”
कोर्ट ने मौखिक रूप से चेतावनी दी कि अगर अधिकारी इस खतरे को नियंत्रित करने में नाकाम रहे, तो पतंगबाजी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
कागज़ों में बैन, ज़मीन पर मौतें?
कोर्ट को बताया गया कि चाइनीज मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध है।
इस पर इंदौर बेंच ने जिला प्रशासन से सख्त सवाल पूछते हुए कहा कि “कागज़ों में सब ठीक दिखता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत बिल्कुल उलटी कहानी कह रही है।”
यानी— Reports say “ban enforced”, Reality says “people still dying”
कटे गले, घायल लोग, तड़पते पक्षी
हाई कोर्ट ने अखबारों में प्रकाशित कटे हुए गले, गंभीर रूप से घायल लोग, क्षत-विक्षत पक्षियों की तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि ये दृश्य दिल दहला देने वाले हैं और किसी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक हैं।

Gujarat का उदाहरण, MP से सवाल
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि गुजरात में हर साल बड़े पैमाने पर पतंग उत्सव होते हैं, फिर भी वहां इस तरह की मौतों की खबरें अपेक्षाकृत कम आती हैं।
इंदौर बेंच ने सवाल उठाया— “तो फिर मध्य प्रदेश में नियंत्रण क्यों फेल हो रहा है?”
Chief Secretary को सख्त निर्देश
कड़ा रुख अपनाते हुए हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि चाइनीज मांझे को जड़ से खत्म करने के लिए एक सख्त, व्यापक और प्रभावी नीति तैयार की जाए।
Case Timeline: आदेशों के बाद भी हादसे
- 11 दिसंबर 2025: इंदौर व आसपास के जिलों में चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध
- 12 जनवरी 2026: दुर्घटनाएं रोकने के लिए सख्ती के आदेश
- मकर संक्रांति 2026: इसके बावजूद कई घातक घटनाएं
कोर्ट ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि बैन के बाद भी लोगों की जान जा रही है।
मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी। इंदौर बेंच इस मुद्दे पर पहले ही स्वत: संज्ञान ले चुकी है।
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