मां ने की शाहरुख़ को फंसाने की साजिश, लिव-इन पार्टनर ने खोला राज

महेंद्र सिंह
महेंद्र सिंह

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां थाना कैसरबाग क्षेत्र में 6 साल की मासूम बच्ची, सना फराह खान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। यह हत्या न केवल बच्ची की जान के साथ, बल्कि एक मां की बर्बरता और साजिश को भी उजागर करती है। शुरू में यह घटना एक साधारण घरेलू झगड़ा लग रही थी, लेकिन जांच में जो खुलासा हुआ, उसने सबको चौंका दिया।

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कहानी: एक मां की साजिश, पति को फंसाने की कोशिश

मामला तब सामने आया जब रोशनी खान (बच्ची की मां) ने पुलिस को कॉल कर कहा कि उसके पति शाहरुख़ ने उसकी बेटी की हत्या कर दी। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की, लेकिन घटनास्थल पर बदबू और बार-बार बदलते बयानों ने पुलिस को संदेह में डाल दिया। यह मौत केवल कुछ घंटे पुरानी नहीं, बल्कि 36 घंटे पुरानी थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि बच्ची की मौत दम घुटने से हुई, जिसमें उसका मुंह और गला दबाया गया था।

रोशनी का बयान: पति को फंसाने की साजिश

जांच में रोशनी ने अपनी बेटी सना की हत्या करना कबूल कर लिया। उसने बताया कि उसने शाहरुख़ को फंसाने के लिए यह खौ़फनाक कदम उठाया। रोशनी, जो पहले एक बार में काम करती थी, अपने पति से अलग रह रही थी और लिव-इन पार्टनर उदित जायसवाल के साथ रह रही थी। रविवार को उसने बेटी की हत्या कर दी, ताकि वह अपने पति को बदनाम कर सके। और फिर, अगले दिन पुलिस को हत्या की सूचना दी।

लिव-इन पार्टनर उदित का खुलासा: हत्या के बाद पार्टी

जब पुलिस ने रोशनी के लिव-इन पार्टनर उदित जायसवाल से पूछताछ की, तो उसने सारा राज खोल दिया। उदित ने बताया कि सना की हत्या रविवार रात को ही गला दबाकर की गई थी। इसके बाद, दोनों ने मजे से पार्टी भी की, जैसे कुछ हुआ ही नहीं। अगले दिन, जब शाहरुख़ घर आया और झगड़ा हुआ, तो रोशनी ने उसे फंसाने के लिए पुलिस को हत्या की सूचना दी।

पुलिस का संदेह और सख्त पूछताछ

पुलिस को रोशनी के बार-बार बदलते बयानों ने शक में डाल दिया था। उसका हर कदम और बयान संदेहास्पद था। पुलिस ने जांच में पाया कि यह सारा मामला शाहरुख़ को फंसाने की साजिश थी, जिसमें उदित जायसवाल का भी सहयोग था।

आखिरकार सच्चाई का खुलासा

पुलिस की कड़ी पूछताछ के बाद, सना की हत्या की सच्चाई सामने आई। यह पूरी घटना एक खौ़फनाक साजिश का हिस्सा थी, जिसमें मासूम बच्ची की जान गई। अब सवाल यह उठता है कि क्या ऐसे जघन्य अपराध के बाद भी मां को बख्शा जा सकता है? क्या समाज में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए और कड़े कदम उठाने की जरूरत नहीं है?

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