
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में शादी-ब्याह से जुड़ा एक नया और सख्त फतवा चर्चा में है। कोसीकला क्षेत्र के सराय इलाके में ईदगाह कमेटी द्वारा आयोजित मुस्लिम कुरैशी समाज की महापंचायत में यह फैसला लिया गया कि अगर किसी शादी में DJ या बैंड-बाजा बजाया गया, तो वर-वधू पक्ष का सामाजिक बहिष्कार (Hukka-Pani Band) किया जाएगा।
पंचायत के अनुसार, शादी में DJ बजाना इस्लामिक परंपराओं के खिलाफ है और इसे हर हाल में बंद किया जाना चाहिए।
Panchayat Verdict: DJ = Social Boycott
महापंचायत में साफ कहा गया कि समझाने के बावजूद DJ बजा → समाज से बहिष्कार। वर या वधू पक्ष से सामाजिक संबंध खत्म। “खाओ-पीओ, उठो-बैठो” सब बंद।
यानि शादी की खुशियां DJ पर नहीं, डर पर टिकी होंगी!
Nikah Without DJ: मौलाना भी हुए सख्त
फैसले के मुताबिक जिस शादी में DJ या बैंड बजेगा। कोई मौलाना निकाह नहीं पढ़ेगा। बाहर से बुलाए गए काजी भी निकाह से इनकार करेंगे। इतना ही नहीं… अगर कोई मौलाना नियम तोड़कर निकाह पढ़ता है, तो उस पर ₹11,000 का जुर्माना। समाज के स्तर पर कार्रवाई अलग।

Fatwa Goes Statewide: मस्जिदों में भेजा गया आदेश
मथुरा ईदगाह से जारी यह फतवा प्रदेश की सभी मस्जिदों को भेज दिया गया है। निकाह से पहले नियमों की जानकारी देना अनिवार्य। यानि अब शादी से पहले कार्ड नहीं, DJ-अनुमति पत्र चाहिए होगा!
DJ बंद, पर दहेज?
सवाल ये है कि DJ पर फतवा। शोर पर पाबंदी लेकिन दहेज, दिखावा और फिजूलखर्ची पर…?
समाज सुधार अगर सच में मकसद है, तो सिर्फ स्पीकर नहीं, सोच का वॉल्यूम भी कम होना चाहिए। मथुरा का यह फतवा एक बार फिर दिखाता है कि भारत में शादी सिर्फ दो लोगों का नहीं, पूरा सिस्टम संभालता है। DJ बजे या न बजे— शादी खुशियों की होनी चाहिए, डर की नहीं।
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