
देश के 12 राज्यों में आज से SIR (Special Intensive Revision) शुरू हुआ है, लेकिन पश्चिम बंगाल में ये प्रक्रिया सीधा सियासी विस्फोट बन गई है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस “चुनावी जादू” को बेनकाब करने के लिए खुद सड़क पर उतरकर मोर्चा संभाल लिया।
रेड रोड से लेकर जोरासांको ठाकुरबाड़ी तक 3.8 किलोमीटर लंबा पैदल मार्च — और जनता का ऐसा सैलाब कि जैसे ममता का हर कदम केंद्र की ओर एक राजनीतिक तीर हो।
“SIR या Scandal in Revision?” — TMC का तंज
टीएमसी ने आरोप लगाया कि SIR कोई तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि “धांधली इन रिवीजन” है।
ममता बनर्जी ने कहा — “ये वोटर लिस्ट अपडेट नहीं, विपक्ष मिटाने का ऑपरेशन है!”
हजारों टीएमसी समर्थक झंडे लहराते हुए नारे लगा रहे थे — “SIR हटाओ, बंगाल बचाओ!”, “EC नहीं, BJP की एजेंसी!”
‘खाला’ बनाम ‘खेला’ — शुभेंदु अधिकारी का पलटवार
भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता के मेगा मार्च को “जमात कार्यक्रम” बताया और आरोप लगाया कि “टीएमसी बांग्लादेशी मुसलमानों के वोट बैंक की रक्षा कर रही है।”
उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनाव आयोग को “फर्जी दस्तावेज़ों” के सबूत सौंपे हैं और अब “ममता का SIR” यानी सस्पेक्टेड इलेक्शन रिवीजन उजागर होने वाला है।

राजनीतिक पिच पर फिर शुरू हुआ ‘खेला’
अब बंगाल की सियासत एक बार फिर गरम है — एक तरफ ममता बनर्जी “लोकतंत्र बचाओ” के नारों के साथ मैदान में हैं, दूसरी ओर भाजपा “फर्जी वोटर हटाओ” का अभियान चला रही है।
जनता सोच में है — ये मार्च लोकतंत्र के लिए है या वार्मअप मैच?
SIR की पूरी फुल फॉर्म अब शायद यही है — “Siyasi Intensity Rising!”
क्योंकि जब ममता बनर्जी सड़क पर उतरती हैं, तो सिर्फ आवाज़ नहीं उठती — बंगाल हिल जाता है!
“दुबई बनाते बिहारी, बिहार में धूल खाते?” — राहुल का जोशीला हमला
