“महाराष्ट्र में सियासी गर्मी! शिंदे–फडणवीस के बीच क्या सच में ठन गई?”

हुसैन अफसर
हुसैन अफसर

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता बदलाव में एकनाथ शिंदे को डिप्टी सीएम पद मिलने और देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद से ही राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है। दोनों दलों ने कई बार माहौल शांत करने की कोशिश की, लेकिन अंदरूनी तनाव बार-बार सतह पर आता रहा।

ताजा बहस शुरू हुई है शिंदे के हालिया बयान से, जिसमें उन्होंने सहयोगी दलों को “गठबंधन धर्म निभाने” की सलाह दी। इस बयान ने महायुति की आंतरिक राजनीति पर नए सवाल खड़े कर दिए।

शिंदे की बगावत से लेकर डिप्टी सीएम बनने तक की कहानी

यह सब तब शुरू हुआ जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के कई विधायकों को साथ लेकर बगावत की, जिसके बाद पार्टी दो हिस्सों में बंट गई। माना जाता है कि यह पूरा घटनाक्रम BJP की स्क्रिप्ट पर आधारित था। बगावत के बाद शिंदे गुट + BJP ने सरकार बनाई। शिंदे बने CM  फडणवीस को बनना पड़ा Deputy CM

बाद में अजित पवार भी महायुति में शामिल हुए और गठबंधन ने विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की। इस बार सत्ता फडणवीस के पास आई और शिंदे को डिप्टी सीएम बनना पड़ा। लेकिन राजनीतिक खटास की खबरें बंद नहीं हुईं।

अंदरूनी तकरार और टूटा अनौपचारिक समझौता

शिवसेना को सबसे ज्यादा झटका तब लगा जब उनके कॉर्पोरेटर्स और कार्यकर्ता लगातार BJP में शामिल होने लगे। तकरार बढ़ने पर दोनों दलों ने एक अनौपचारिक समझौता किया कि वे एक-दूसरे के नेताओं को नहीं तोड़ेंगे। लेकिन यह समझौता कुछ ही हफ्तों में टूट गया।

इसके बाद शिवसेना के कई नेता— रूपसिंह धाल, आनंद ढोके, शिल्पारानी वाडकर, अनमोल म्हात्रे—सीधे BJP में जा पहुंचे। अंदर की टूट-फूट यहीं से उजागर होने लगी।

फडणवीस–शिंदे होटल में थे, लेकिन मुलाकात नहीं हुई

मुंबई निकाय चुनाव की तैयारियों के दौरान दोनों नेता एक ही होटल में थे, लेकिन दोनों की मुलाकात नहीं हुई। मीडिया में चर्चा बढ़ी तो फडणवीस ने सफाई दी— “मैं देर से आया था और सुबह जल्दी निकल गया। कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। हम रोज फोन पर बात करते हैं।”

शिंदे ने भी मामले को हल्का करने की कोशिश की, लेकिन उनका अगला बयान सब पर भारी पड़ गया।

शिंदे ने कहा—“हम गठबंधन धर्म निभा रहे हैं, सहयोगी भी निभाएं”

यह बयान साफ संकेत देता है कि महायुति में विश्वास की कमी बढ़ रही है। शिंदे के शब्दों ने गठबंधन की अंदरूनी खींचतान को सार्वजनिक कर दिया।

इधर NCP नेता माणिकराव कोकाटे ने भी हमला बोला— “BJP पूरी तरह बंटी हुई है, उनकी राजनीति सिर्फ मैनिपुलेशन पर टिके है।”

शिवसेना मंत्री उदय सामंत ने भी स्वीकार किया कि सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

मुंबई निकाय चुनाव पर बड़ा असर संभव

घटनाओं की रफ्तार बताती है कि महायुति में दरार गहरी हो चुकी है। अगर तनाव ऐसे ही चलता रहा तो शिवसेना, BJP और एनसीपी मुंबई निकाय चुनाव अलग-अलग लड़ने का फैसला कर सकती हैं— जो महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा भूचाल ला सकता है।

मोदी जी तो बड़े वो निकले! Mango आदमी का चैन से धुआँ उड़ाना भी गुनाह

Related posts

Leave a Comment