एक सीट… तीन दावेदार! महाराष्ट्र में ‘राज्यसभा रिंग’ में MVA की कुश्ती

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

महाराष्ट्र की सियासत इस वक्त शतरंज की बिसात बन चुकी है, जहां मोहरे कम और महत्व ज्यादा है। राज्यसभा की सिर्फ एक “विपक्ष योग्य” सीट बची है, और उसी पर कांग्रेस व शिवसेना UBT आमने-सामने खड़े हैं।

खबरों के मुताबिक, कांग्रेस ने उद्धव ठाकरे से अपील की है कि यह सीट पार्टी को दी जाए। वजह साफ है राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद दांव पर है। फिलहाल यह जिम्मेदारी कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge निभा रहे हैं।

अगर सीट हाथ से गई, तो गणित भी जाएगा और गरिमा भी।

अहम है यह सीट

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष बने रहने के लिए कम से कम 25 सांसदों का आंकड़ा जरूरी है। कांग्रेस के पास अभी 27 सदस्य हैं, लेकिन अप्रैल में कई सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

इसमें Sharad Pawar, Priyanka Chaturvedi, Ramdas Athawale, Bhagwat Karad और Rajni Patil जैसे नाम शामिल हैं।

ऐसे में एक सीट भी “ऑक्सीजन सिलेंडर” बन गई है। राजनीति में कभी-कभी एक अंक ही पूरी कहानी लिख देता है।

कांग्रेस की रणनीति: सीट दो, MLC लो

सूत्रों के अनुसार, महाराष्ट्र कांग्रेस प्रभारी रमेश चेन्नीथला ने उद्धव ठाकरे से कहा है कि यह सीट कांग्रेस को दी जाए। बदले में शिवसेना UBT को MLC सीट ऑफर की जा सकती है।

मतलब सीधी भाषा में कहें तो “राज्यसभा के बदले विधान परिषद” का पैकेज डील। मगर सवाल है क्या शिवसेना UBT इस सौदे को स्वीकार करेगी?

शिवसेना UBT का दावा

आदित्य ठाकरे पहले ही संकेत दे चुके हैं कि रोटेशन नीति के अनुसार यह सीट उनकी पार्टी को मिलनी चाहिए। शिवसेना UBT के पास 20 विधायक हैं, कांग्रेस के पास 16 और शरद पवार गुट के पास 10।

संख्या के तराजू पर देखें तो शिवसेना UBT का पलड़ा हल्का नहीं है। वरिष्ठ नेता संजय राउत का भी कहना है कि अंतिम फैसला बातचीत से होगा, लेकिन विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते उनका रुख निर्णायक रहेगा।

MVA में ‘मित्रता’ की असली परीक्षा

महाविकास अघाड़ी यानी MVA का गठबंधन अब असली टेस्ट में है। एक सीट, तीन महत्वाकांक्षाएं और सीमित गणित।

सुप्रिया सुले ने भी गठबंधन सहयोगियों से अपने पिता शरद पवार के समर्थन की अपील की है। यानी दावेदारी का दायरा और चौड़ा हो गया है।राजनीति में दोस्ती तब तक मीठी लगती है जब तक कुर्सी साझा करनी न पड़े।

5 मार्च की डेडलाइन, 16 मार्च का फैसला

नामांकन की आखिरी तारीख 5 मार्च है और नतीजे 16 मार्च को आएंगे। तब तक महाराष्ट्र की राजनीति में बयान, बैकडोर मीटिंग्स और रणनीतिक मुस्कानें चलती रहेंगी।

यह सिर्फ एक सीट नहीं है। यह विपक्षी एकजुटता की परीक्षा है, गणित की जंग है और प्रतिष्ठा का सवाल भी। राज्यसभा की यह कुर्सी फिलहाल महाराष्ट्र की सियासत का सबसे महंगा फर्नीचर बन चुकी है।

ताकत की टकराहट, कीमत एक बच्ची की? 14 महीने की ज़हरा की गलती क्या!

Related posts

Leave a Comment