
आप सभी को महाशिवरात्रि की पावन शुभकामनाएं। भगवान शिव आपके जीवन से अज्ञान का अंधकार दूर कर ज्ञान, शांति और संतुलन का प्रकाश फैलाएं।
यह पर्व सिर्फ व्रत और जागरण का नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम और परिवर्तन का भी अवसर है।
महादेव से आज के समाज को क्या सीखना चाहिए?
आज की Fast-paced, stress-driven दुनिया में महादेव की जीवन शैली एक powerful life-manual की तरह है।
विष पीकर भी शांत रहना
नीलकण्ठाय शान्ताय नमः शिवाय शम्भवे।
भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान विष को स्वयं ग्रहण किया, लेकिन उसे हृदय में नहीं उतारा।
आज के समाज में negativity, criticism और विषैले शब्द बहुत हैं। महादेव सिखाते हैं “ज़हर को गले तक रोक लो, दिल तक मत जाने दो।”
सरलता में महानता
वन्दे देवम् उमापतिं सुरगुरुं वन्दे जगत्कारणम्।
महादेव कैलाश पर साधारण वेश में रहते हैं। न आडंबर, न दिखावा।
Luxury नहीं, character असली पहचान है। आज की सोशल मीडिया driven दुनिया में simplicity सबसे बड़ी rebellion है।
स्त्री सम्मान
अर्धनारीश्वराय नमः।

शिव का अर्धनारीश्वर रूप बताता है कि पुरुष और स्त्री समान शक्ति के प्रतीक हैं।
Gender equality कोई modern concept नहीं, सनातन का मूल तत्व है। समाज में संतुलन तभी आएगा जब सम्मान बराबरी का होगा।
ध्यान और आत्मसंयम
योगीश्वराय महादेवाय नमः।
शिव योग के आदिगुरु हैं। उनकी समाधि बताती है कि बाहरी शोर के बीच भी आंतरिक शांति संभव है।
Digital distractions के दौर में Meditation luxury नहीं, necessity है।
आज के दौर में “शिवत्व” क्या है?
- क्रोध कम, करुणा अधिक
- दिखावा कम, सच्चाई अधिक
- शोर कम, ध्यान अधिक
- विभाजन कम, संतुलन अधिक
महादेव हमें बताते हैं कि शक्ति का अर्थ विनाश नहीं, बल्कि संरक्षण और संतुलन है।
महाशिवरात्रि का संदेश
इस महाशिवरात्रि, सिर्फ “हर हर महादेव” कहने से आगे बढ़ें। महादेव को जीवन में उतारें। अपने भीतर के अहंकार को त्यागें, अपने भीतर की करुणा को जगाएं, और अपने भीतर के शिव को पहचानें।
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