रूस की हरकतें हद से बाहर, NATO ने किया MiG-31 को एयरबॉर्न जवाब

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

रूस एक बार फिर विवादों के घेरे में है। शुक्रवार को तीन रूसी MiG-31 लड़ाकू विमानों ने एस्टोनिया की हवाई सीमा में बिना अनुमति के प्रवेश किया और 12 मिनट तक फिनलैंड की खाड़ी के ऊपर उड़ान भरी।

इस दुस्साहसपूर्ण घटना पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्लेटफ़ॉर्म ‘X’ (पूर्व ट्विटर) पर लिखा:

“मैं एस्टोनिया में रूसी विमानों की घुसपैठ की कड़ी निंदा करता हूं। यह रूस की लगातार उकसाने वाली और ग़ैर-ज़िम्मेदाराना कार्रवाइयों का हिस्सा है।”

मैक्रों का सख्त संदेश: “एस्टोनिया को मिलेगा पूरा समर्थन”

अपने संदेश में मैक्रों ने सिर्फ़ निंदा नहीं की, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि फ्रांस एस्टोनिया के साथ खड़ा है। उन्होंने लिखा:

“इन बार-बार होने वाले उल्लंघनों के जवाब में सुरक्षा का रुख़ अपनाया जाएगा।”

इस बयान के ज़रिए मैक्रों ने साफ संकेत दे दिया कि यूरोपीय सीमा की रक्षा अब सिर्फ़ राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं, रणनीतिक प्राथमिकता है।

NATO का जवाब: रूसी फाइटर्स हुए इंटरसेप्ट

घटना के तुरंत बाद NATO ने भी अपनी तत्परता दिखाई। नेटो के अनुसार, तीनों रूसी विमानों को इंटरसेप्ट किया गया, जिससे यह साबित होता है कि बाल्टिक क्षेत्र में निगरानी और जवाबी कार्रवाई को लेकर कोई कोताही नहीं बरती जा रही।

एस्टोनिया के विदेश मंत्रालय ने भी इस घुसपैठ की कड़ी निंदा की है और इसे “दुस्साहसपूर्ण और खतरनाक कदम” बताया है।

बढ़ती चिंता: बाल्टिक देशों पर रूसी निगाहें?

यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब यूक्रेन युद्ध के चलते यूरोपीय सुरक्षा को लेकर तनाव चरम पर है

रूस का यह एक और उकसावे वाला कदम ना सिर्फ़ एस्टोनिया, बल्कि लातविया, लिथुआनिया और फ़िनलैंड जैसे देशों के लिए भी चेतावनी की घंटी है।

हवाई सीमा लांघी तो जवाब ज़रूर मिलेगा!

राष्ट्रपति मैक्रों का बयान और NATO की तत्परता यह दिखाते हैं कि अब कोई भी घुसपैठ हल्के में नहीं ली जाएगी। रूस की ‘MiG-मंडली’ भले ही आसमान में दहाड़े मारती हो, लेकिन यूरोपीय यूनियन और NATO का मैसेज साफ है — “उड़ना है तो नियमों में उड़ो, वरना इंटरसेप्ट तय है।”

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