
लखनऊ, जहां चाय से ज़्यादा “तशरीफ़” का महत्व है, और “क्या हाल है?” से पहले “हुज़ूर” लगा देना ज़रूरी समझा जाता है। यहां भाषा सिर्फ बातचीत का ज़रिया नहीं, बल्कि नवाबी ठाठ का एक अंग है।
बक्का – जब कुछ पक्का से भी ज़्यादा पक्का हो!
“Arey बक्का बता रहे हैं, भाई साहब!”
यह शब्द सुनने में सीधा-सादा लगे, लेकिन लखनऊ में इसकी हैसियत शपथ से कम नहीं। बक्का मतलब – शुद्ध देसी, बिना मिलावट वाला ‘सच’। बच्चा बोले तो Cute, लखनवी बोले तो “बक्का कसम से!”
फट्टा – डर का लखनऊ वर्जन
लखनऊ में डर लगना नहीं होता, फट्टा लग जाता है।
“Arey फट्टा लग गया था यार, जब बिजली चली गई आधी रात को।”
और अगर कोई कह दे “फट्टू है तू”, तो समझ लीजिए आपकी बहादुरी पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं।
झकास – सिर्फ मुम्बई नहीं, लखनऊ भी झकास है
लखनऊ वाले ‘झकास’ को सिर्फ Style के लिए नहीं, Approval के लिए यूज़ करते हैं।
“तेरी नई जैकेट झकास है रे!”
तशरीफ़ – बैठो नहीं, तशरीफ़ रखो
अब ये लखनऊ है बाबू, यहाँ “बैठ जाओ” नहीं बोला जाता, “तशरीफ़ रखिए” कहा जाता है। और अगर कोई बोले “तशरीफ़ ले आइए”, तो वो कुछ और नहीं, आपको आदरपूर्वक बुला रहा है।
इतनी तहज़ीब कहाँ मिलेगी, जनाब?
औकात – एक शब्द, हज़ार माइने
लखनऊ में ‘औकात’ याद दिलाना एक संस्कार है।
“तू अपनी औकात में रह…” – यह वाक्य उतना ही common है जितना कि यहाँ का Tunday Kabab।
लग रहा है लखनऊ से हो – तारीफ या ताना?
“तेरा accent सुनके लग रहा है लखनऊ से हो…”
अब ये तारीफ है या ताना, ये आपके Reaction पर डिपेंड करता है।
“बक्कल झाड़ना” – No Cap, Bro!
मतलब? किसी को सबक सिखा देना या मूँह बंद करा देना।
“अरे कल शर्मा जी कुछ ज्यादा ही बकैती कर रहे थे, हमने बक्कल झाड़ दी उनकी!”
लखनऊ में ये शब्द उतना ही आम है जितना मुंबई में “भाई”, और दिल्ली में “बॉस”। सिर्फ एक्सप्रेशन नहीं, ये वॉर्निंग है – नवाबी स्टाइल में।
“बकैती” – जब बातों का पजामा ढीला हो जाए
बकैती यानी बिना सिर-पैर की बातें करना। हर फ्रेंड ग्रुप में एक बकैतीबाज़ ज़रूर होता है – जो बातों की गंगा बहा देता है, चाहे मतलब निकले या नहीं।
“तू फिर बकैती कर रहा है? चल हट!”
बकैती करना लखनऊ में टाइम पास नहीं, एक टैलेंट है।
“तफ़री” – Serious मत लो, Chill मारो!
घूमना-फिरना, टाइम पास करना यानी तफ़री मारना।
“चलो यार थोड़ा हजरतगंज की तफ़री हो जाए!”
ये शब्द सुनते ही लगता है जैसे गाड़ी स्टार्ट करो और किसी भी चाय की दुकान पर बैठ जाओ – बिना गिलास की कुल्हड़ वाली चाय, नो टेंशन।
“बड़े नवाब बन रहे हो!” – Hidden Roast Alert
जब कोई खुद को VIP समझने लगे – लखनऊ वाला एक लाइन में उतार देता है।
“अरे चाय बनाने को बोला और ये साहब बड़े नवाब बन गए!”
इसे सुनकर सामने वाला हँसे या शर्माए, पर लाइन मारक होती है।
“चाय-समोसा में हाथ सेंकना” – सबके Favourite
मतलब? कोई भी इवेंट हो, मुफ़्त में शामिल हो जाना।
“बिना बुलाए भी आ गया? चाय-समोसे में हाथ सेंकने!”
लखनऊ में शराफ़त से कटाक्ष करने का इससे बेहतर तरीका नहीं।
“निकी-निकिया” – Cuteness Overload
ये शब्द किसी चीज़ को छोटा या क्यूट दिखाने के लिए यूज़ होता है।
“निकी-निकिया बात पे इतना नाराज़ क्यों हो रहे हो?”
मतलब बात का बतंगड़ मत बनाओ, और थोड़ा हँस भी लिया करो।

“भौजी” – Universal Pronoun of Love & Confusion
यह शब्द लखनऊ में सबके लिए है – चाहे आप रिश्ते में हो या नहीं।
“भौजी ज़रा ईधर तशरीफ लाइए, चाय ठंडी हो रही है।”
इस शब्द का इस्तेमाल इतना कॉमन है कि कई बार लोग अपनी असली भाभी से भी पूछ लेते हैं, “आप कौन भौजी हैं?”
“टपकना” – No Entry Without This Word
लखनऊ में आना है तो “आइए” नहीं “टपकिए” कहिए।
“भइया कल टपकिए हमारे यार की शादी में, चिकन लाजवाब मिलेगा।”
“टपकना” यहाँ action word नहीं, emotion word है।
“बकलोल” – High Level की बेइज़्ज़ती, लेकिन तहज़ीब के साथ
किसी को गाली नहीं देनी लेकिन फिर भी समझाना है कि दिमाग कहाँ है? बस बोल दीजिए:
“का बकलोल टाइप बात कर रहे हो यार!”
यह insult भी है, compliment भी, depending on tone।
“पउवा” – Spirit of the Town
यह शब्द सिर्फ quantity नहीं, एक lifestyle है।
“भइया आज ऑफिस से छुट्टी है, एक पउवा लेते हैं!”
कभी-कभी तो लगता है लखनऊ में ‘पउवा’ ही GDP है।
“अबे ओ भइये!” – Respect के साथ ताना
लखनऊ में कोई किसी को गाली नहीं देता, लेकिन ‘भइये’ बोलकर वो काम भी हो जाता है।
“अबे ओ भइये, सामने देख के चलो!”
यहाँ प्यार और पंगा एक ही शब्द में पैक है।
Bonus Words
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‘घुच्चा’ = चुपचाप
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‘चांप’ = चपल इंसान या उस्ताद टाइप
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‘कचक’ = Tight slap (प्यारा अंदाज़)
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‘धत्त तेरे की’ = साइलेंट वॉर शुरू
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‘लतखोर’ = Habitual ka freaky version
लखनऊ की जबान में जो बात है…
…वो न दिल्ली के attitude में है, न मुंबई के slang में। लखनऊ के शब्द आपको हँसाने के साथ-साथ अपनेपन का एहसास भी देंगे। अगर आपने ये शब्द नहीं सुने, तो आप ज़िंदगी के ‘टेस्टी’ हिस्से से दूर हैं।
“गुज़रे लीजेंड लॉर्ड स्वराज पॉल ! बेटी के नाम से बनाई थी करोड़ों की विरासत”
