
लखनऊ की बारिश का अपना ही रोमांटिक टच होता है – ख़ासकर जब कोई सैयारा अपनी सैयारिनी के साथ गोमतीनगर की सड़कों पर बाइक स्लो मोशन में भगाता है, एक हाथ में कॉफी, दूसरे में इश्क़। हवा में नमी है, ज़ुबां पे इबादत।
लेकिन…
गोमतीनगर से निकलते ही, जैसे ही “असली लखनऊ” की गलियों में एंट्री होती है — वहाँ शुरू होती है नाले एक्सप्रेस, और बजबजाता मूड-किलर।
सैयारा को लगा था बॉलीवुड, पर मिला लखनऊ नगर निगम प्रोडक्शन!
“इम्तियाज़ अली की कोई फिल्म चल रही है!” — यही सोचकर सैयारा भीगते-भीगते आगे बढ़ा, लेकिन जैसे ही उसने देखा:
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सीवर ओवरफ्लो मोड ऑन
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नाले में गमले, चप्पल और एक टूटी चाय की केतली तैरती मिली
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सड़क पर बाइक नहीं, नाव चलानी चाहिए थी
बस फिर क्या था — रोमांस का रिमोट नगर विकास वाले शर्मा जी ने खींच के बंद कर दिया।
शर्मा जी से पूछो, गोमती में रोमांस था, लेकिन नालों में क्यों T-ट्रेजडी?
नगर विकास विभाग की जो तैयारी थी, वो बारिश में ऐसे बह गई जैसे WhatsApp ग्रुप में किए गए “साफ़-सफाई अभियान” के मेसेज।
शर्मा जी हर साल प्लानिंग करते हैं:
“इस बार बारिश से पहले सब ठीक करवा दूंगा बेटा।”
और हर साल नाले जवाब देते हैं:
“Challenge Accepted.” 💩
लखनऊ की बारिश: Half Romantic, Half Aquatic
लखनऊ में मानसून का मतलब है – आधा दिन इश्क़ में, आधा दिन जाम में।
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गोमतीनगर में K-dramatic वाइब
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चारबाग में Water-logistic रियलिटी शो
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अलीगंज से लेकर अमीनाबाद तक, हर गली बनी है “Naala: The Return”
और अंत में…
तो भाइयों और बहनों, सैयारा का दिल तो गया गोमतीनगर की गलियों में, लेकिन उसकी बाइक फिसल गई बजबजाते नालों में। इश्क़ की बारिश चल रही थी, पर सामने से निकला टंकी भर के सीवर का फव्वारा, और लगा जैसे नगर निगम कह रहा हो – “हम भी निभाते हैं, अपने-अपने तरीके से।”
सैयारा ने तय किया है अब अगली डेट पर वो कश्मीर नहीं, केवल छत पर जाएगा। कम से कम वहाँ रोमांस बहेगा, नाला नहीं।
और अगर आप भी इस मानसून में “बाइक पर बारिश” और “गली में गोता” एक साथ झेल चुके हैं — तो अगली बार निकलने से पहले सिर्फ छाता नहीं, कस्टमाइज़्ड बोटिंग किट ले आइए।
क्योंकि लखनऊ में बारिश का मौसम है – “दिल भी बहता है… और नाला भी।”
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