
बिहार की राजनीति एक बार फिर से भावनात्मक आग में तप रही है — और इस बार चिंगारी छेड़ी गई है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को कथित गाली से,जिसे लेकर NDA ने बुलाया बिहार बंद, और लालू यादव ने उठाया “बिहारी स्वाभिमान” का झंडा।
‘बंद’ नहीं, NDA ने किया भावनात्मक जाम!
7 बजे सुबह से 12 बजे दोपहर तक बिहार बंद ऐसा रहा जैसे बिहार में साप्ताहिक भावुक अवकाश हो गया हो।
रिजिजू तक जाम में फंस गए, पत्रकारों की गाड़ियां उलटी, और बसें छांव में सो गईं।
जरूरी सेवाएं छोड़कर हर भावना ठहर गई — यानी “इमोशनल ट्रैफिक रूल” लागू थे।
लालू यादव का ‘एक्स’ फैक्टर – “क्या मोदी ने गाली देने का आदेश दिया?”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लालू यादव ने खुलकर लिखा:
“क्या प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपाइयों को आदेश दिया है कि बिहार की माताओं-बहनों को गाली दो?”
उन्होंने PM को लपेटते हुए कहा:
“गुजराती लोग बिहारियों को इतने हल्के में न लें। ये बिहार है।”
बयान में वो “बाहरी बनाम स्थानीय” कार्ड खेलते दिखे —
मतलब: ये सिर्फ विवाद नहीं, बिहारी अस्मिता का मुद्दा है।
BJP पर गंभीर आरोप – “महिलाओं, शिक्षिकाओं को गाली दी जा रही है”
लालू का आरोप – “BJP के गुंडे सम्मानित शिक्षिकाओं, गर्भवती महिलाओं और पत्रकारों को गालियां दे रहे हैं।”
मतलब, राजनीति अब बहस से निकलकर बदतमीजी के आरोपों तक आ गई है।
अब चुनाव नहीं, “गाली-बंदी बनाम गारंटी” की लड़ाई होने जा रही है।
NDA ने कहा – “मां का अपमान नहीं सहेंगे”
NDA नेताओं ने बिहार बंद को पीएम मोदी की मां के लिए “सम्मान यात्रा” बना दिया। राहुल गांधी की कथित टिप्पणी के खिलाफ गुस्से में सड़कों पर उतरे नेता, तेजस्वी यादव और लालू के खिलाफ नारेबाज़ी और टायर जलाए गए।
कहावत सच हो गई – “जहां टायर जले, वहां इलेक्शन पके!”
रिजिजू फंसे जाम में, लेकिन मुद्दा निकला आम से खास
बिहार बंद इतना व्यापक रहा कि केंद्रीय मंत्री रिजिजू तक NH-20 पर जाम में फंसे। लोग कह रहे हैं – “देश में मंत्री चल सकते हैं, गाड़ी नहीं।”
चुनाव से पहले भावनात्मक ‘ट्रिगर’ का खेल शुरू
यह विवाद अब चुनावी मुद्दा बन चुका है — BJP ‘मां के सम्मान’ को केंद्र में ला रही है, तो RJD ‘बिहारी अस्मिता’ की बात कर रही है।
भावनाओं का घोल, वोटों की हांडी में पकने को तैयार है।
लालू का संदेश NDA को – “बिहारी को हल्के में लिया, तो खुद भारी पड़ जाओगे”
लालू का यह बयानी हमला ना सिर्फ पलटवार है, बल्कि ‘बिहारी बनाम बाहरी’ की राजनीति को फिर से ज़िंदा करने की कोशिश है।
2025 का चुनाव अब मुद्दों पर नहीं, माओं और मानों पर होगा।
“बिहार में राजनीति अब भाषण से नहीं, भावना से खेली जाती है — और लालू बोले तो माइक फटता है, मोदी बोले तो विरोधी फड़फड़ाते हैं!”
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