कोलकाता मेट्रो उद्घाटन: मोदी का मंच, ममता का विजन?

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

आज कोलकाता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन अहम मेट्रो लाइनों — येलो लाइन, ग्रीन लाइन और ऑरेंज लाइन — का उद्घाटन किया।
लेकिन इस उद्घाटन में एक और बात ने सबका ध्यान खींचा — मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की गैरमौजूदगी।

येलो लाइन (नोआपारा – बिमान बंदर/जय हिंद):

इस लाइन की कल्पना 2009-10 के रेलवे बजट में ममता बनर्जी ने की थी, जब वो रेल मंत्री थीं। इसका उद्देश्य शहर के उत्तर हिस्सों को एयरपोर्ट से जोड़ना था।

ग्रीन लाइन (सियालदह – एस्प्लेनेड):

ममता ने इस रूट का संरेखण सेंट्रल एवेन्यू से बीबीडी बाग के ज़रिए बदल कर साल्ट लेक को कनेक्ट किया था। इसका पहला हिस्सा 2022 में चालू हो चुका था, और अब यह पूरा नेटवर्क शहर के दो बिज़ी हब्स को जोड़ता है।

ऑरेंज लाइन (कवि सुभाष – बिमान बंदर):

2009-10 के बजट में ममता ने इस लाइन की भी घोषणा की थी। मार्च 2024 में PM मोदी ने इसका पहला चरण खोला था और अब इसका दूसरा भाग भी चालू हो रहा है।

राजनीति बनाम परियोजना: श्रेय की जंग!

इन तीनों मेट्रो लाइनों की नींव ममता बनर्जी के रेल मंत्री कार्यकाल में रखी गई थी। आज जब प्रधानमंत्री मोदी इनका उद्घाटन कर रहे हैं, ममता की अनुपस्थिति ने ये सवाल खड़ा कर दिया है:

“विकास के श्रेय की असली हकदार कौन?”

यह कोई पहला मौका नहीं है, जब किसी सार्वजनिक परियोजना को लेकर राजनीतिक क्रेडिट वॉर हुआ हो।

ममता का विज़न सिर्फ़ मेट्रो तक सीमित नहीं था

रेल मंत्री के तौर पर ममता ने 101 रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय बनाने की योजना भी शुरू की थी, जिसमें से 60 स्टेशन 2009-11 के बजट में शामिल किए गए थे।

इसलिए यह बहस अब और गहराती जा रही है कि — “क्या परियोजनाओं का श्रेय उसे मिलना चाहिए जिसने नींव रखी या उसे जिसने उद्घाटन किया?”

अनुपस्थिति में मौजूदगी: ममता का साइलेंट स्टेटमेंट?

ममता बनर्जी ने उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल न होकर भी एक राजनीतिक बयान दे दिया है। राजनीतिक गलियारों में इसे सांकेतिक विरोध और “श्रेया की राजनीति” से दूरी बनाने की रणनीति माना जा रहा है।

जहां एक ओर PM मोदी ने विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देते हुए नई मेट्रो लाइनों का उद्घाटन किया, वहीं ममता बनर्जी की अनुपस्थिति ने यह दिखा दिया कि भारतीय राजनीति में परियोजनाएं जितनी ज़मीनी होती हैं, उतनी ही राजनीतिक भी।

“रेल की पटरियों पर दौड़ता विकास, और उसके साथ-साथ दौड़ती है राजनीति की रेल — कौन आगे निकलेगा?”

“वार्ता भी चलेगी, हमला भी होगा – नेतन्याहू का डबल गेम!”

Related posts

Leave a Comment