
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में एक बार फिर डिजिटल सन्नाटा पसरा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के आदेश पर जिले के तीन संवेदनशील इलाकों में 2G, 3G, 4G और यहां तक कि 5G इंटरनेट सेवाएं भी तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दी गई हैं। सरकार का तर्क साफ है—राष्ट्र-विरोधी तत्वों द्वारा इंटरनेट के संभावित दुरुपयोग को रोकना।
किन Services पर लगा ब्रेक?
आदेश के मुताबिक, Mobile Internet (2G–5G), Data-based messaging, Social media access सब कुछ अस्थायी रूप से ठप है। यानी कॉल चलेगी, लेकिन WhatsApp “Connecting…” पर अटका रहेगा।
Government Logic vs Ground Reality
सरकारी भाषा में यह फैसला preventive security measure है, लेकिन ज़मीन पर इसका असर आम लोगों पर पड़ता है, Students की online classes ठप। Local traders का digital payment रुका। पत्रकारों और नागरिकों के लिए सूचना तक पहुंच सीमित।
राष्ट्र-विरोधी ताकतें तो VPN ढूंढ लेती हैं, लेकिन आम नागरिक नेटवर्क खोजते रह जाते हैं।
Legal Backing और Security Angle
MHA का यह आदेश Telecom Suspension Rules के तहत जारी हुआ है। प्रशासन का दावा है कि यह कदम limited area + limited time के लिए है। हालांकि, सवाल वही पुराना है, Security vs Civil Liberty का balance आखिर कब मिलेगा?

Kashmir और Internet Shutdown: पुराना रिश्ता
कश्मीर में इंटरनेट बंद होना अब Breaking News कम, Routine ज्यादा हो गया है। हर बार वजह अलग होती है, लेकिन असर एक-सा—डिजिटल isolation।
किश्तवाड़ में इंटरनेट सस्पेंशन सरकार की security-first policy का हिस्सा है, लेकिन यह भी सच है कि हर shutdown लोकतंत्र के digital spine पर एक दबाव डालता है। सवाल सिर्फ इतना है—क्या इसका smarter तरीका संभव नहीं?
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