
कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने हालिया घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बिना औपचारिक युद्ध घोषणा के किसी राष्ट्राध्यक्ष पर सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय नियमों की भावना के खिलाफ है। उनका बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei को लेकर वैश्विक स्तर पर गहरी चर्चा चल रही है।
खरगे ने स्पष्ट किया कि Indian National Congress इस तरह की किसी भी लक्षित हत्या की निंदा करती है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून की बुनियादी मर्यादाओं के विरुद्ध मानती है।
Article 51 और भारत की विदेश नीति
अपने बयान में खरगे ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 51 का हवाला दिया, जो अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और कानून के सम्मान की प्रतिबद्धता पर जोर देता है।
कांग्रेस का तर्क है कि किसी मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की targeted killing सिर्फ एक सैन्य घटना नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीतिक संतुलन पर सीधा प्रहार है। पार्टी ने कहा कि विवादों का समाधान dialogue और diplomacy से होना चाहिए, न कि ड्रोन और मिसाइल से।
Global Optics: सिर्फ ईरान नहीं, पूरी दुनिया देख रही है
इस बयान में कांग्रेस ने ईरान की जनता और विश्वभर के शिया समुदाय के प्रति संवेदना जताई। संदेश साफ था India must stand for rule-based order.
मिडिल ईस्ट में बढ़ती अस्थिरता के बीच भारत जैसे देश के लिए संतुलित रुख रखना आसान नहीं है। एक तरफ रणनीतिक साझेदारियां, दूसरी तरफ नैतिक कूटनीति दोनों के बीच पतली रेखा पर चलना पड़ता है।
जब दुनिया “स्ट्राइक बनाम स्ट्राइक बैक” की भाषा में उलझी है, तब दिल्ली से “Article 51” की याद दिलाना अपने आप में एक राजनीतिक सिग्नल है।

यह बयान सिर्फ ईरान पर टिप्पणी नहीं, बल्कि एक broader diplomatic posture है कि भारत की राजनीति में कम से कम कुछ लोग अभी भी ‘Rule Book’ खोलकर पढ़ रहे हैं।
सवाल यह है क्या अंतरराष्ट्रीय सिस्टम में नियम अब भी उतने ही मजबूत हैं, जितना भाषणों में दिखते हैं?
खरगे का बयान घरेलू राजनीति में भी चर्चा का विषय बनेगा। जहां एक धड़ा इसे मानवीय और संवैधानिक रुख कहेगा, वहीं दूसरा इसे विदेश नीति में अनावश्यक दखल बता सकता है।
लेकिन इतना तय है यह बयान सिर्फ एक ट्वीट नहीं, बल्कि एक strategic positioning है। Congress ने साफ संकेत दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय विवादों में “peace-first doctrine” को समर्थन देती है।
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