
कर्नाटक में सिद्धरमैया और डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने एक ऐसा प्रशासनिक कदम उठाया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज़ कर दिया है। बेंगलुरु के फकीर कॉलोनी और वसीम लेआउट में बिना किसी पूर्व नोटिस के करीब 400 अवैध मकानों को ध्वस्त किया गया।
सरकार का दावा है कि कार्रवाई सरकारी ज़मीन से अवैध कब्जे हटाने के लिए की गई, लेकिन विपक्ष इसे मानवीय और संवैधानिक सवालों से जोड़ रहा है।
Pinarayi Vijayan का बड़ा आरोप
केरल के मुख्यमंत्री पीनराई विजयन ने इस कार्रवाई को “चौंकाने वाला और दर्दनाक” बताते हुए आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार ने उत्तर भारत में चर्चित ‘Bulldozer Justice Model’ को अपनाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि “गरीबों को घर देने की बात करने वाली कांग्रेस सरकार, बिना नोटिस घर तोड़ने जैसी कठोर कार्रवाई क्यों कर रही है?”
विजयन ने इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन करार दिया।
Opposition Reactions: Mamata से PDP तक
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं।
- ममता बनर्जी ने इसे “अल्पसंख्यकों के खिलाफ अन्याय” बताया।
- PDP विधायक (J&K) ने सवाल उठाया कि क्या ऐसे कदम समाज में “Majority vs Minority” की सोच को बढ़ावा देते हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह बहस तेज़ हो गई कि क्या नियम सबके लिए समान हैं।
DK Shivakumar का जवाब: “यह Bulldozer Politics नहीं”
उप मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कार्रवाई सरकारी ज़मीन पर हुई। ज़मीन रहने योग्य नहीं थी। इसे खाली करना अनिवार्य प्रशासनिक ज़रूरत थी। उन्होंने साफ कहा कि “बाहरी नेताओं को कर्नाटक के प्रशासनिक फैसलों में दखल नहीं देना चाहिए, और इसे यूपी मॉडल से जोड़ना गलत है।”
Process पर उठे सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों और कानूनी विशेषज्ञों ने बिना नोटिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने भी दिल्ली से फोन कर सरकार को “ज्यादा संवेदनशील और सावधान रहने” की सलाह दी।
विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में स्पष्ट किया है कि Notice देना अनिवार्य है। पर्याप्त समय और सुनवाई जरूरी है।
UP Model vs Constitutional Process
उत्तर प्रदेश में हुई Bulldozer कार्रवाई पर भी सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि “कानून के दायरे में, सभी पक्षों को सुनकर ही कार्रवाई होनी चाहिए।”

यही कारण है कि कर्नाटक की इस कार्रवाई को लेकर Legal Scrutiny की संभावना जताई जा रही है।
Internal Congress Politics का एंगल?
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यह कदम आगामी चुनावों, कांग्रेस के अंदरूनी power डायनामिक्स से जुड़ा हो सकता है।
कुछ विश्लेषक मानते हैं कि “Budget के बाद CM Change की अटकलों के बीच यह action political messaging का हिस्सा हो सकता है।”
हालांकि सरकार ने इन अटकलों को सिरे से खारिज किया है।
जो मॉडल कल तक “Opposition का हथियार” कहा जा रहा था, आज उसी पर सवाल उठ रहे हैं — “Bulldozer neutral होता है या political?”
‘Bulldozer Justice’ Debate फिर ज़िंदा
इस कार्रवाई ने देशभर में एक बार फिर Bulldozer Justice Debate को हवा दे दी है। अब सबकी नजर इस पर है कि क्या मामला कोर्ट तक पहुंचेगा? और न्यायिक प्रक्रिया इस पर क्या दिशा तय करती है?
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