
पड़ोसी देश बांग्लादेश में युवा नेता उस्मान हादी की मौत के बाद फैली अशांति और हिंसक प्रदर्शनों ने भारत–बांग्लादेश संबंधों को नई चुनौती में डाल दिया है। हालात कुछ हद तक शांत जरूर हुए हैं, लेकिन दोनों देशों के रिश्तों में तनाव और अविश्वास साफ नजर आ रहा है।
इसी बीच विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भारत की पड़ोसी नीति और बांग्लादेश के हालात पर खुलकर बात की है।
IIT Madras में जयशंकर का बयान
शुक्रवार को IIT मद्रास में एक कार्यक्रम के दौरान जब बांग्लादेश में अशांति और भारत की भूमिका पर सवाल पूछा गया, तो विदेश मंत्री ने कहा- “हमें अलग-अलग तरह के पड़ोसी मिले हैं। अगर कोई पड़ोसी आपके साथ अच्छा व्यवहार करता है, या कम से कम आपको नुकसान नहीं पहुंचाता, तो स्वाभाविक रूप से आप उसकी मदद करते हैं—भारत यही करता है।”
उन्होंने बताया कि यही संदेश उन्होंने बांग्लादेश नेतृत्व को भी दिया है।
Neighbourhood First Policy: सिर्फ नारा नहीं
जयशंकर ने कहा कि भारत की विदेश नीति का मूल सिद्धांत साफ है। जहां Good Neighbourly Spirit दिखता है। वहां भारत Invest करता है, Help करता है, Cooperate करता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, कोविड काल में भारत ने पड़ोसी देशों को सबसे पहले वैक्सीन दी। श्रीलंका संकट के दौरान भारत ने 4 अरब डॉलर का सहायता पैकेज दिया, जब IMF से बातचीत धीमी थी।
“यह केवल कूटनीति नहीं, ज़िम्मेदारी है।”
‘वसुधैव कुटुंबकम’ का असली अर्थ
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत जब ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की बात करता है, तो उसका मतलब यह नहीं कि दुनिया शत्रु है—“हम दुनिया को कभी hostile environment की तरह नहीं देखते, जहां हर समय defensive रहना पड़े।”

उन्होंने जोड़ा कि सीमित संसाधनों में भी maximum impact कैसे लाया जाए—यही आज की भारतीय कूटनीति का लक्ष्य है।
Bangladesh Context: रिश्तों में खटास क्यों?
- हालिया हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता
- भारत-विरोधी narratives का उभार
- Minority safety और regional stability की चिंता
इन सबके बीच भारत direct confrontation नहीं, बल्कि measured diplomacy का रास्ता अपना रहा है।
पड़ोसी दोस्त जैसे होते हैं, कुछ रिश्तेदार जैसे— भारत दोनों से निभाने की कोशिश करता है!
कूटनीति में आवाज़ ऊंची नहीं, वज़नदार शब्द काम आते हैं।
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बांग्लादेश में हालात जैसे भी हों, भारत का संदेश साफ है— जो पड़ोसी साथ चलता है, भारत उसके साथ खड़ा रहता है। और जो रास्ता बदलता है, उससे बात बंद नहीं करता—बस सावधान हो जाता है। यही आज की भारतीय कूटनीति की पहचान है।
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