Iran में मस्जिद जली, इंटरनेट कटा, सड़कों पर जनता vs मौलाना

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

ईरान इस वक्त Protest Explosion के दौर से गुजर रहा है। 28 दिसंबर से शुरू हुआ जनविरोध अब विकराल रूप ले चुका है। मौलाना शासन की सख्ती, इंटरनेट बैन और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बावजूद जनता सड़कों से हटने को तैयार नहीं

अब तक यह आंदोलन 21 प्रांतों के 50 से ज्यादा शहरों में फैल चुका है, जिसने खामेनेई सरकार की नींव हिला दी है।

तेहरान में अल-रसूल मस्जिद को बनाया निशाना

शुक्रवार रात ईरान की राजधानी तेहरान में हालात बेकाबू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने अल-रसूल मस्जिद पर हमला कर उसे आग के हवाले कर दिया।

यह मस्जिद केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि खामेनेई की सत्ता का प्रतीक मानी जाती है। मस्जिद जलते ही सड़कों पर नारे, ड्रम और जश्न—स्पष्ट संकेत कि गुस्सा अब प्रतीकों पर वार कर रहा है।

जहां कभी तकरीरें होती थीं, वहां अब आग बोल रही है।

ईरानी डॉक्टर का दावा: 217 मौतें सिर्फ 6 अस्पतालों में

एक ईरानी डॉक्टर ने मीडिया इंटरव्यू में चौंकाने वाला दावा किया है। उनके अनुसार- तेहरान के सिर्फ 6 अस्पतालों में 217 प्रदर्शनकारियों की मौत। ज्यादातर मौतें गोली लगने से। असली आंकड़े इससे कहीं ज्यादा हो सकते हैं।

हालांकि सरकार ने इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट्स हालात की गंभीरता बयां कर रही हैं।

Internet Shutdown भी नाकाम, सड़कों पर जारी बवाल

सरकार ने हालात काबू में करने के लिए इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद। National Security का हवाला। सुरक्षा बलों को फ्री-हैंड इसके बावजूद तेहरान, इस्फहान, मशहद समेत कई शहरों में बैंक, पुलिस स्टेशन, सरकारी इमारतें निशाने पर रहीं।

जब पेट खाली और आवाज़ बंद हो, तब पत्थर बोलते हैं।

प्रदर्शन क्यों? वजह सिर्फ महंगाई नहीं

ये आंदोलन केवल आर्थिक संकट तक सीमित नहीं है। लोग सड़कों पर हैं क्योंकि बेरोजगारी चरम पर, महंगाई आसमान पर, धार्मिक सत्ता से थकान, खामेनेई शासन से असंतोष। यानी ये System vs Citizens की सीधी लड़ाई बन चुकी है।

Global Angle: Reza Pahlavi और Trump मीटिंग की चर्चा

इसी बीच खबरें हैं कि रेज़ा पहलवी अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर सकते हैं। क्या यह सिर्फ मीटिंग है या Regime Change की स्क्रिप्ट?

ईरान में सवाल गूंज रहा है— क्या ये विरोध प्रदर्शन इतिहास बदलेंगे?

ईरान अब Protest Phase से Revolt Phase में प्रवेश कर चुका है। मस्जिद जलना, इंटरनेट कटना और गोलियों की गूंज—ये संकेत हैं कि मामला अब केवल प्रदर्शन नहीं रहा।

आने वाले दिन Middle East Politics के लिए बेहद निर्णायक हो सकते हैं।

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