
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दुनिया को संकेत नहीं, अलर्ट दे दिया है — ईरान पर संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रतिबंध फिर से थोपे जा सकते हैं। और वो भी इसी महीने के अंत तक।
कहां दिया बयान?
इजरायली टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में जब मैक्रों से पूछा गया कि:
“क्या ईरान पर इस महीने के अंत तक प्रतिबंध लौट सकते हैं?”
तो उनका जवाब था:
“हां, मुझे ऐसा लगता है।”
क्यों? क्योंकि — “ईरानियों से हमें जो ताज़ा जानकारी मिली है, वह गंभीर नहीं है।”
(यानि बातचीत में बात नहीं बन रही!)
क्या है ‘Snapback Mechanism’?
अगर आपको ये “स्नैपबैक” कुछ टेक्निकल टर्म लग रहा है, तो जान लीजिए:
यह 2015 की ईरान न्यूक्लियर डील (JCPOA) का वो सीक्रेट बटन है जो अगर कोई देश दबाए, तो…
UN के पुराने सभी प्रतिबंध दोबारा लग जाते हैं
(जैसे गेम में Restart बटन)

मतलब हथियारों की बिक्री पर रोक। परमाणु टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट पर पाबंदी। फ्रीज़ किए गए बैंक अकाउंट्स। और इंटरनेशनल लेवल पर ‘No Entry’ बोर्ड।
कौन तैयार बैठा है बटन दबाने को?
पिछले महीने ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने मिलकर snapback process शुरू कर दी है। अब केवल क्लिक का इंतज़ार है। इन देशों का कहना है कि ईरान ने परमाणु डील की शर्तों का उल्लंघन किया है।
(मतलब — डील है पर दिल नहीं!)
ईरान क्या कर रहा है?
ईरान पर आरोप है कि वो अपने यूरेनियम संवर्धन (uranium enrichment) को बढ़ा रहा है। और IAEA (International Atomic Energy Agency) से पूरी पारदर्शिता नहीं बरत रहा। यानि मामला “न्यूक्लियर एनर्जी या न्यूक्लियर पॉलिटिक्स?” जैसा हो चला है।
“Diplomacy में patience नहीं, paperwork चलता है!”
मैक्रों के इस बयान को कूटनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि अब ईरान के पास वक्त कम है। अगर इस महीने के अंत तक संतोषजनक रिपोर्ट या प्रतिबद्धता नहीं दिखी, तो:
“Sanctions Are Back, Baby!”
भारत के लिए क्या मायने?
भारत जैसे देश जो ईरान से तेल आयात करते थे, चाबहार पोर्ट में निवेश कर रहे हैं, या क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक्टिव हैं, उनके लिए यह बड़ा जियोपॉलिटिकल अलर्ट है।
फ्रांस के मैक्रों ने शब्दों से साफ कर दिया कि डील की डेडलाइन खत्म हो रही है। “अब या तो ईरान compliance करे, या फिर सजा भुगते।” और अगर स्नैपबैक हुआ, तो यह सिर्फ परमाणु प्रतिबंध नहीं होगा — यह कूटनीतिक Domino Effect की शुरुआत हो सकती है।
“Nuclear diplomacy में trust की expiry date बहुत short होती है — और मैक्रों ने घंटी बजा दी है!”
“मैं नहीं गया, मुझे ले जाया गया!” — ओली का इस्तीफे के बाद पहला बयान
