USS Abraham Lincoln पर अटैक का दावा, अमेरिका– “एक खरोंच तक नहीं”

हुसैन अफसर
हुसैन अफसर

मिडिल ईस्ट का आसमान इन दिनों मिसाइलों से कम और दावों से ज्यादा भरा हुआ है। एक तरफ ईरान की सेना कह रही है कि उसने अमेरिकी विमानवाहक पोत को हिला कर रख दिया, दूसरी तरफ अमेरिका का जवाब है कि जहाज पर खरोंच तक नहीं आई।

यानी जंग सिर्फ समुद्र में नहीं, बयानबाज़ी में भी चल रही है। इस टकराव का नया केंद्र बना है अमेरिकी जंगी जहाज USS Abraham Lincoln, जिसके बारे में ईरान ने दावा किया कि उस पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया।

IRGC का दावा: “हमने जहाज को नुकसान पहुंचाया”

ईरान की सैन्य शाखा Islamic Revolutionary Guard Corps यानी IRGC का कहना है कि अरब सागर में तैनात अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को निशाना बनाया गया। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ओमान के पास लगभग 340 किलोमीटर दूर खड़े अमेरिकी युद्धपोत पर ड्रोन और मिसाइल से हमला किया गया।

ईरान का दावा है कि हमले के बाद जहाज को भारी नुकसान हुआ और उसे पीछे हटना पड़ा। यहीं नहीं, ईरान ने बहरीन में मौजूद अमेरिकी नेवी बेस पर भी ड्रोन अटैक करने की बात कही। अगर यह दावा सच होता तो यह मिडिल ईस्ट की जंग में अब तक का सबसे बड़ा सैन्य झटका माना जाता। लेकिन कहानी का दूसरा हिस्सा इससे बिल्कुल अलग है।

अमेरिका का जवाब: “हमले को हवा में ही रोक दिया”

अमेरिकी नौसेना ने ईरान के इन दावों को सीधे खारिज कर दिया। नौसेना के मुताबिक जहाज पूरी तरह सुरक्षित है और किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ। अमेरिका ने दावा किया कि जहाज की ओर बढ़ रहे खतरे को पहले चेतावनी दी गई और बाद में हमला करके खत्म कर दिया गया। इस कार्रवाई में जहाज पर लगे Mark-45 गन सिस्टम और हेलफायर मिसाइलों से लैस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया।

नतीजा यह हुआ कि खतरा खत्म हो गया और विमानवाहक पोत अपनी तैनाती पर बना रहा।

बयानबाज़ी की जंग भी उतनी ही तेज

मिडिल ईस्ट में तनाव अब उस स्तर पर पहुंच चुका है जहां हर हमला और हर बयान दुनिया भर के बाजारों और सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

ईरान साफ कह चुका है कि वह अमेरिका और उसके सहयोगियों को “सबक सिखाने” तक हमले जारी रखेगा।

दूसरी ओर अमेरिका और उसके सहयोगी Israel भी अपने सैन्य अभियान को जारी रखने की बात कह रहे हैं।

इसका मतलब साफ है: यह संघर्ष अभी खत्म होने वाला नहीं।

समुद्र से लेकर कूटनीति तक बढ़ता खतरा

मिडिल ईस्ट के इस टकराव का असर केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं है। तेल बाजार, शिपिंग रूट और वैश्विक सुरक्षा सभी इस तनाव से प्रभावित हो रहे हैं। अगर विमानवाहक पोतों पर सीधे हमले की घटनाएं बढ़ती हैं तो यह संघर्ष और बड़ा रूप ले सकता है।

और तब इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक होगा।

सच क्या है? जंग में अक्सर धुंध होती है

युद्ध का एक नियम हमेशा से रहा है सच्चाई अक्सर सबसे आख़िर में सामने आती है। ईरान के दावे और अमेरिका के खंडन के बीच असली तस्वीर क्या है, यह फिलहाल साफ नहीं है। लेकिन इतना तय है कि मिडिल ईस्ट की इस आग में हर दिन एक नई कहानी लिखी जा रही है।

और दुनिया उस कहानी को सांस रोककर देख रही है।

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