जंग के बीच India को राहत! Iran ने हमारे लिए खोल दिया Hormuz Strait

हुसैन अफसर
हुसैन अफसर

मिडिल ईस्ट में बारूद की गंध अभी हवा में है, मिसाइलें अभी भी आसमान में रास्ता तलाश रही हैं, लेकिन इस युद्ध के शोर के बीच भारत के लिए एक राहत की खबर आई है। ईरान ने आखिरकार होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों को गुजरने की अनुमति दे दी है।

यह वही समुद्री गला है जिसे कुछ दिन पहले बंद कर दिया गया था और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की सांस अटक गई थी। भारत में एलपीजी सिलेंडर से लेकर पेट्रोलियम कंपनियों तक, हर जगह एक ही सवाल था  “अगर रास्ता बंद रहा तो क्या होगा?”

अब फिलहाल उस सवाल का जवाब राहत की तरह आया है।

क्यों इतना अहम है होर्मुज स्ट्रेट? दुनिया की ऊर्जा का सबसे संकरा दरवाज़ा

होर्मुज स्ट्रेट कोई साधारण समुद्री रास्ता नहीं है। यह वह पतली समुद्री नस है, जिससे दुनिया की ऊर्जा का बड़ा हिस्सा बहता है। ईरान और ओमान के बीच मौजूद यह जलमार्ग हर दिन 2 करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चे तेल को दुनिया तक पहुंचाता है।

दूसरे शब्दों में कहें तो दुनिया की कुल तेल खपत का लगभग 20% और समुद्री तेल व्यापार का करीब 25% इसी रास्ते से गुजरता है।

सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि दुनिया की बड़ी मात्रा में LNG यानी Liquefied Natural Gas भी इसी समुद्री रास्ते से दुनिया के बाजारों तक पहुंचती है।

अमेरिका-इजरायल हमले के बाद क्यों बंद हुआ रास्ता? जंग की पहली आर्थिक लहर

28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला किया, तब यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी। इसका असर सीधे दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर पड़ना तय था। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया। और जैसे ही यह खबर आई, दुनिया के तेल बाजारों में हलचल मच गई।

एनर्जी मार्केट में एक पुरानी कहावत है “अगर होर्मुज बंद हुआ, तो दुनिया का पेट्रोल पंप कांप जाएगा।”

भारत के लिए क्यों था यह बड़ा खतरा? LPG और कच्चे तेल की सप्लाई पर मंडरा रहा था संकट

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर काफी हद तक निर्भर है। सऊदी अरब, कतर, यूएई और कुवैत से आने वाला कच्चा तेल और एलपीजी अक्सर इसी होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता तो भारत में LPG सिलेंडर महंगे हो सकते थे। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आता। पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ता। साधारण शब्दों में कहें तो रसोई से लेकर अर्थव्यवस्था तक हर जगह असर दिखता।

भारत को कैसे मिली यह राहत? ईरान का संकेत और समुद्री रास्ते का खुलना

ताजा घटनाक्रम में ईरान ने भारतीय जहाजों को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दे दी है। यह फैसला भारत के लिए रणनीतिक राहत माना जा रहा है। इससे भारत की ऊर्जा सप्लाई फिलहाल सामान्य बनी रह सकती है। मिडिल ईस्ट की राजनीति में स्थिरता उतनी ही दुर्लभ है जितनी रेगिस्तान में बारिश।

वैश्विक बाजार क्यों अब भी सतर्क? जंग अभी खत्म नहीं हुई

हालांकि भारत के जहाजों को रास्ता मिल गया है, लेकिन वैश्विक बाजार अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हैं। क्योंकि मिडिल ईस्ट में संघर्ष की चिंगारी अभी बुझी नहीं है। अगर हालात फिर बिगड़े, तो तेल बाजारों में उथल-पुथल दोबारा शुरू हो सकती है।

मिडिल ईस्ट की राजनीति अक्सर दुनिया की रसोई तय करती है। कभी मिसाइलें चलती हैं और असर LPG सिलेंडर पर दिखता है। अभी के लिए भारत को राहत मिली है। लेकिन ऊर्जा सुरक्षा की यह कहानी याद दिलाती है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था कभी-कभी सिर्फ एक संकरे समुद्री रास्ते पर टिकी होती है।

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