
अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के माहौल में दक्षिण ईरान में 5.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। जर्मनी के भू-विज्ञान अनुसंधान केंद्र (GFZ) के मुताबिक, झटका लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर आया। कम गहराई होने के कारण असर अपेक्षाकृत ज्यादा महसूस हुआ।
हालांकि, सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक हलकों में इसे लेकर परमाणु परीक्षण की अटकलें भी शुरू हो गईं लेकिन अभी तक ऐसी किसी बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
क्या परमाणु परीक्षण की थ्योरी में दम है?
युद्ध जैसे माहौल में हर प्राकृतिक घटना को शक की नजर से देखा जाता है। ईरान पहले ही अमेरिका को कड़ी चेतावनी दे चुका है कि यदि हमला हुआ तो जवाब भी उतना ही सख्त होगा। वहीं अमेरिका ने भी क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है। ऐसे में अचानक आया भूकंप कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है।
लेकिन विशेषज्ञों का साफ कहना है कि दक्षिण ईरान टेक्टोनिक गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील इलाका है। यहां प्लेट्स की हलचल आम बात है।
कभी-कभी धरती सिर्फ इसलिए कांपती है क्योंकि वह भूगर्भीय रूप से जिंदा है, हर झटका “सियासी विस्फोट” नहीं होता।
वैज्ञानिक क्या कह रहे हैं?
भूकंप वैज्ञानिकों के अनुसार:

- केंद्र लगभग 10 किमी गहराई पर
- कम गहराई = ज्यादा झटका महसूस होना
- क्षेत्र पहले से भूकंपीय रूप से सक्रिय
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां, जिनमें जर्मन भू-विज्ञान संस्थान भी शामिल है, स्थिति की निगरानी कर रही हैं। अब तक किसी असामान्य रेडिएशन या परमाणु गतिविधि की पुष्टि नहीं की गई है।
लोगों में दहशत, सरकार अलर्ट
झटकों के बाद प्रभावित क्षेत्रों में दहशत का माहौल है। आपातकालीन सेवाओं को अलर्ट पर रखा गया है और राहत टीमें मैदान में तैनात हैं। आफ्टरशॉक की आशंका को देखते हुए हाई अलर्ट जारी है। युद्ध की चर्चा पहले से ही हवा में थी, ऐसे में भूकंप ने मनोवैज्ञानिक असर और बढ़ा दिया।
मिडिल ईस्ट का संवेदनशील समीकरण
मध्य पूर्व पहले ही भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी तीखी हो चुकी है। दोनों तरफ से सख्त रुख अपनाया जा रहा है। ऐसे माहौल में कोई भी प्राकृतिक घटना तुरंत अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन जाती है। लेकिन तथ्य और अटकलों के बीच फर्क बनाए रखना बेहद जरूरी है।
डर बनाम डेटा
- डेटा कहता है: यह प्राकृतिक भूकंप है।
- सोशल मीडिया कहता है: शायद कुछ और।
- आधिकारिक पुष्टि: परमाणु परीक्षण की कोई पुष्टि नहीं।
इसलिए फिलहाल निष्कर्ष से ज्यादा निगरानी महत्वपूर्ण है।
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