ममता बनर्जी की एंट्री से गरमाई राजनीति, कौन हैं I-PAC के Co-Founder Pratik Jain?

अजमल शाह
अजमल शाह

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी देश की राजनीति में अब आम बात हो चुकी है, लेकिन गुरुवार को पश्चिम बंगाल के सॉल्ट लेक स्थित इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (IPAC) पर हुई रेड ने सियासी तापमान अचानक बढ़ा दिया।

इस कार्रवाई को खास बना दिया मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अचानक IPAC ऑफिस में एंट्री ने। जहां ED अधिकारी दस्तावेज़ों की जांच में जुटे थे, वहीं ममता बनर्जी ने मौके पर पहुंचकर पूरी कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए।

क्या है IPAC और क्यों है इतना पावरफुल?

I-PAC कोई साधारण कंपनी नहीं, बल्कि देश की सबसे प्रभावशाली Political Consultancy Firms में से एक है।

स्थापना: 2014 (Lok Sabha Elections से पहले), Founder: प्रशांत किशोर (Prashant Kishor), हेडक्वार्टर: Salt Lake, Kolkata

I-PAC ने चुनावी राजनीति को डेटा, बूथ मैनेजमेंट और माइक्रो-स्ट्रेटजी के जरिए नई दिशा दी।

कौन हैं Pratik Jain? ED Raid के केंद्र में नाम

प्रतीक जैन, I-PAC के Co-Founder और मौजूदा Director, इस रेड के बाद सुर्खियों में हैं।

प्रोफाइल स्नैपशॉट:

  1. उम्र: लगभग 34 साल
  2. शिक्षा: IIT Bombay Graduate
  3. भूमिका: Political Strategy, Data Analytics & Campaign Planning

साल 2021 में प्रशांत किशोर के कंपनी छोड़ने के बाद ऋषि राज सिंह, विनेश चंदेल और प्रतीक जैन I-PAC के डायरेक्टर बने।

TMC और IPAC: चुनावी जीत की केमिस्ट्री

2019 के बाद से I-PAC:

  • TMC और West Bengal Government के साथ काम कर रही है
  • 2021 Assembly Election में TMC की बंपर जीत
  • 2024 Lok Sabha Elections में मजबूत प्रदर्शन

इन दोनों जीतों का क्रेडिट अक्सर I-PAC की रणनीति को दिया जाता है — और शायद यही बात केंद्र बनाम राज्य की राजनीति में खटक रही है।

ED Raid पर ममता बनर्जी का सियासी वार

ममता बनर्जी ने ED की कार्रवाई को लेकर साफ कहा कि “ये हमारी राजनीतिक रणनीति चुराना चाहते हैं।”

इतना ही नहीं, उन्होंने पूरे बंगाल में TMC कार्यकर्ताओं से विरोध प्रदर्शन का ऐलान कर दिया। संदेश साफ है — “रेड सिर्फ ऑफिस पर नहीं, सीधे राजनीति पर है।”

आज की राजनीति में सवाल ये नहीं कि रेड क्यों हुई, सवाल ये है कि रणनीति फाइल में थी या दिमाग में? और अगर दिमाग में थी, तो ED उसे कैसे जब्त करेगी?

कुत्तों का दिमाग पढ़ना संभव नहीं है कि वे कब काटेंगे- सुप्रीम संदेश

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