
भारत और अमेरिका के बीच 500 करोड़ की ट्रेड डील की चर्चा के बीच अब ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़ी हलचल दिख रही है। Petronet LNG Limited के CEO Akshay Kumar Singh ने संकेत दिए हैं कि अगर अमेरिका competitive pricing देता है तो भारत वहां से Liquified Natural Gas (LNG) खरीद सकता है।
यानी साफ संदेश — “Price right, deal tight.”
भारत क्यों देख रहा है अमेरिका की ओर?
भारत इस समय दुनिया का चौथा सबसे बड़ा गैस आयातक है। उर्वरक उत्पादन, रिफाइनरी सेक्टर और गैस आधारित पावर प्लांट्स की बढ़ती मांग को देखते हुए आने वाले वर्षों में गैस की जरूरत और बढ़ने वाली है।
ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) अब सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि रणनीतिक प्राथमिकता बन चुकी है।
Trade Boost का संकेत
हाल ही में अमेरिका ने भारत पर लगाए गए कुछ टैरिफ घटाए हैं। इससे bilateral trade में तेजी आने की उम्मीद है। 2024-25 में भारत-अमेरिका व्यापार लगभग 132 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। यदि LNG डील आगे बढ़ती है तो यह आंकड़ा और तेज़ी से ऊपर जा सकता है।
Energy cooperation, defence deals और technology partnership — ये तीनों मिलकर Indo-US relations को नया आयाम दे सकते हैं।
सस्ती LNG = सस्ती बिजली?
भारत में लगभग 27,000 मेगावाट गैस आधारित पावर प्लांट्स हैं, लेकिन महंगी गैस के कारण उनकी क्षमता पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पा रही। अगर अमेरिका से सस्ती LNG मिलती है तो बिजली उत्पादन बढ़ेगा। पावर टैरिफ घट सकता है। उद्योगों की लागत कम होगी। अर्थव्यवस्था में multiplier effect देखने को मिल सकता है।

किसानों और गृहणियों के लिए क्या मतलब?
LNG का सबसे बड़ा असर उर्वरक उद्योग पर पड़ेगा।
सस्ती गैस = सस्ती खाद
सस्ती खाद = कम खेती लागत
कम लागत = सस्ती फल-सब्ज़ी और अनाज
इसके अलावा PNG और CNG के दाम कम होने की संभावना भी बन सकती है। यानी kitchen से लेकर car तक राहत।
“गैस सस्ती तो सब सस्ता!” अब सवाल सिर्फ इतना है — अमेरिका ‘दोस्ती का रेट’ लगाएगा या ‘डॉलर वाला रेट’?
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