थार रेगिस्तान से निकल रहा तेल, संकट में सरकार का ‘मास्टरस्ट्रोक’

सैफी हुसैन
सैफी हुसैन, ट्रेड एनालिस्ट

दुनिया तेल के संकट में फंसी है… होर्मुज बंद है, सप्लाई अटक गई है, और कई देशों में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। लेकिन इसी अफरातफरी के बीच भारत ने एक ऐसा दांव चला है, जिसने सबको चौंका दिया—रेगिस्तान से राहत! जी हां, जब समुद्र का रास्ता बंद हुआ, तो भारत ने Thar Desert की रेत में छिपे ‘ब्लैक गोल्ड’ को निकालकर खेल पलट दिया।

होर्मुज संकट और दुनिया में हड़कंप

Strait of Hormuz के बंद होने से वैश्विक तेल सप्लाई पर गहरा असर पड़ा है। पाकिस्तान, बांग्लादेश, वियतनाम से लेकर ब्रिटेन तक—हर देश इस झटके को महसूस कर रहा है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा, लेकिन यहां सरकार ने संकट को मौके में बदलने की रणनीति अपनाई।

‘थार प्लान’ क्या है? भारत का गेमचेंजर मूव

सरकार ने तेल सप्लाई को स्थिर रखने के लिए ‘थार प्लान’ एक्टिव किया। इसके तहत राजस्थान के थार रेगिस्तान में मौजूद तेल भंडार से उत्पादन बढ़ाया गया। Oil India Limited ने इस मिशन को लीड करते हुए रिकॉर्ड स्तर पर कच्चे तेल का उत्पादन शुरू कर दिया है।

रिकॉर्ड प्रोडक्शन: हर दिन निकल रहा 1200+ बैरल तेल

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जोधपुर की बलुआ पत्थर संरचना से अब रोजाना 1,202 बैरल कच्चा तेल निकाला जा रहा है। पिछले साल यही आंकड़ा 705 बैरल प्रति दिन था—यानी करीब 70% की जबरदस्त बढ़ोतरी। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं… यह भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की तरफ बड़ा कदम है।

रेगिस्तान से रिफाइनरी तक: कैसे पहुंचता है तेल?

राजस्थान के जैसलमेर स्थित बाघेवाला ऑयल फील्ड से निकला तेल टैंकरों के जरिए गुजरात के मेहसाणा में Oil and Natural Gas Corporation के प्लांट तक पहुंचता है।

इसके बाद पाइपलाइन से यह कच्चा तेल Indian Oil Corporation की कोयली रिफाइनरी तक भेजा जाता है, जहां इसे उपयोगी ईंधन में बदला जाता है।

आंकड़ों में समझें ‘थार का दम’

वित्त वर्ष 2025-26 में राजस्थान क्षेत्र से 43,773 मीट्रिक टन कच्चे तेल का उत्पादन हुआ, जो पिछले साल के 32,787 मीट्रिक टन से काफी ज्यादा है। यह दिखाता है कि भारत अब सिर्फ आयात पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि अपने संसाधनों को भी पूरी ताकत से इस्तेमाल कर रहा है।

तकनीक का कमाल: कैसे निकाला जा रहा भारी तेल?

थार का तेल सामान्य नहीं है—यह ‘हेवी ऑयल’ है, जिसकी चिपचिपाहट ज्यादा होती है। इसे निकालने के लिए Oil India Limited ने CSS (Cyclic Steam Stimulation), डाइल्यूएंट इंजेक्शन और आर्टिफिशियल लिफ्ट जैसी एडवांस तकनीकों का इस्तेमाल किया है।

यही वजह है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उत्पादन लगातार बढ़ रहा है।

1991 में खोजा गया था ये खजाना

बाघेवाला ऑयल फील्ड, जो बीकानेर-नागौर बेसिन में स्थित है, 1991 में खोजा गया था। 200 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र में फैले इस फील्ड में 52 कुएं हैं, जिनमें से 33 सक्रिय हैं। 2018 में पहली बार यहां CSS तकनीक का सफल परीक्षण किया गया था, जिसने इस क्षेत्र को गेमचेंजर बना दिया।

सरकार का दावा: ‘घबराने की जरूरत नहीं’

पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ कहा है कि देश में तेल की कोई कमी नहीं है। रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं, स्टॉक पर्याप्त है और देशभर के पेट्रोल पंपों पर सप्लाई सामान्य बनी हुई है।

होर्मुज संकट ने दुनिया को दिखा दिया कि सिर्फ आयात पर निर्भर रहना कितना खतरनाक हो सकता है। भारत ने इस बार जो किया, वह सिर्फ एक अस्थायी समाधान नहीं—बल्कि एक लंबी रणनीति का संकेत है। ‘थार प्लान’ यह साबित करता है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो रेगिस्तान भी ऊर्जा का खजाना बन सकता है।

क्या भारत आत्मनिर्भर बन पाएगा?

यह सवाल अभी खुला है… लेकिन इतना तय है कि भारत अब सिर्फ खरीदार नहीं रहना चाहता। थार का यह कदम बताता है कि आने वाले समय में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को खुद पूरा करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।

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