
मिडिल ईस्ट में जंग की आंच तेज है, तेल 90 डॉलर के पार पहुंच चुका है और दुनिया भर के बाजारों में हलचल मची है। ऐसे माहौल में भारत के करोड़ों वाहन चालकों के मन में एक ही सवाल था क्या कल सुबह पेट्रोल पंप पर दाम बढ़े मिलेंगे?
लेकिन सरकार की तरफ से जो संकेत आए हैं, उन्होंने फिलहाल इस डर पर ब्रेक लगा दिया है। साफ कहा गया है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। हालांकि कहानी का दूसरा हिस्सा थोड़ा कड़वा है जंग का असर आसमान पर दिखने लगा है। दुबई और यूरोप जाने वाली फ्लाइट्स के टिकट ऐसे उछले हैं कि यात्रियों की जेब ढीली हो रही है।
पेट्रोल-डीजल को लेकर सरकार का साफ संदेश
सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत में ईंधन की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है। सरकार के मुताबिक देश के पास पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है और सप्लाई चेन भी फिलहाल सामान्य तरीके से काम कर रही है। इसलिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तुरंत किसी बढ़ोतरी की जरूरत नहीं है। सीधी बात अभी पेट्रोल पंप पर लाइन लगाने की नौबत नहीं आने वाली।
हॉर्मुज पर तनाव, लेकिन भारत ने बदली रणनीति
मिडिल ईस्ट के हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई लाइन माना जाता है। लेकिन भारत ने पिछले कुछ सालों में अपनी रणनीति बदल दी है। पहले भारत करीब 60 फीसदी तेल हॉर्मुज के बाहर के स्रोतों से लाता था। अब यह आंकड़ा बढ़कर करीब 70 फीसदी तक पहुंच चुका है।
यानी अगर वहां हालात बिगड़ते भी हैं तो भारत की सप्लाई पूरी तरह ठप नहीं होगी।
विपक्ष के आरोपों पर सरकार का पलटवार
LPG की कीमतों को लेकर विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला था। इस पर सरकार ने जवाब दिया कि उसका बयान सिर्फ पेट्रोल और डीजल को लेकर था। LPG के बारे में लगाए गए आरोपों को आधारहीन बताया गया है। सरकार का दावा है कि फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखने पर पूरा फोकस है।

लेकिन आसमान में महंगा हो गया सफर
जहां पेट्रोल पंप पर राहत है, वहीं एयरपोर्ट पर हालात उलटे दिख रहे हैं। मिडिल ईस्ट तनाव के बाद दुबई जाने वाली फ्लाइट्स के किराए 60 से 80 फीसदी तक बढ़ गए हैं। यूरोप जाने वाले रूट पर भी टिकट करीब 40 फीसदी तक महंगे हो चुके हैं।
ट्रैवल एजेंट बताते हैं कि दिल्ली-फ्रैंकफर्ट जैसे रूट पर इकॉनमी टिकट कई जगह डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच गया है।
एयरलाइंस को लंबा रास्ता उड़ना पड़ रहा
तनाव के चलते कई देशों ने अपना एयरस्पेस सीमित कर दिया है। इस वजह से एयरलाइंस को वैकल्पिक और लंबे रास्तों से उड़ान भरनी पड़ रही है। इससे ईंधन खर्च बढ़ रहा है और ऑपरेशन कॉस्ट भी ऊपर जा रही है।
नतीजा वही—टिकट के दाम भी उड़ान भर रहे हैं।
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