
दिल्ली की सियासी गलियों से लेकर गांव की चौपाल तक अचानक एक ही शब्द गूंजने लगा है “इलेक्शन।”
देश की सबसे ताकतवर संस्थाओं में गिनी जाने वाली Election Commission of India ने पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है।
जैसे ही तारीखें सामने आईं, राजनीतिक दलों के दफ्तरों में हलचल बढ़ गई और नेताओं की धड़कनें भी। क्योंकि यहां सिर्फ वोट नहीं पड़ते। यहां सत्ता की किस्मत लिखी जाती है।
पांच राज्यों में चुनावी कैलेंडर तय
चुनाव आयोग के अनुसार पांच राज्यों में अप्रैल और मई के बीच पूरी चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
इन राज्यों में शामिल हैं
• Assam
• Kerala
• Tamil Nadu
• West Bengal
• Puducherry
इन सभी जगहों की विधानसभाओं का कार्यकाल मई में समाप्त होने वाला है। तारीखों की घोषणा के साथ ही इन राज्यों में Model Code of Conduct लागू हो चुका है।
मतलब साफ है अब नेताओं के भाषणों से लेकर सरकारी घोषणाओं तक सब पर चुनाव आयोग की नजर रहेगी।
कब और कहां होगी वोटिंग
चुनाव कार्यक्रम को देखें तो यह साफ है कि आयोग ने मतदान को चरणबद्ध तरीके से आयोजित करने का फैसला किया है।
9 अप्रैल 2026
• असम
• केरल
• पुडुचेरी
इन तीनों जगहों पर मतदान एक ही दिन होगा।
23 अप्रैल 2026
• तमिलनाडु
• पश्चिम बंगाल (पहला चरण)
29 अप्रैल 2026
• पश्चिम बंगाल (दूसरा चरण)

और अंत में
4 मई 2026
यानी मतगणना का दिन।
उस दिन पता चलेगा कि किस राज्य में किस पार्टी की किस्मत चमकी और किसकी सियासी पटकथा अचानक बदल गई।
बंगाल में फिर दो चरण, तमिलनाडु में एक ही दिन
राजनीतिक दृष्टि से सबसे ज्यादा नजरें West Bengal पर टिकी हुई हैं। यहां दो चरणों में मतदान होगा। 23 अप्रैल को पहला चरण और 29 अप्रैल को दूसरा चरण। वहीं Tamil Nadu में पूरा चुनाव सिर्फ एक ही चरण में कराया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषक सुरेन्द्र दुबे के मुताबिक तमिलनाडु में मुकाबला दिलचस्प और संभावित रूप से त्रिकोणीय हो सकता है। इसलिए वहां का चुनाव सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का भी संकेत दे सकता है।
17.4 करोड़ मतदाता, 824 सीटों की जंग
इन पांच राज्यों में कुल मिलाकर लगभग 17.4 करोड़ मतदाता वोट डालेंगे। यह संख्या कई देशों की आबादी से भी ज्यादा है।
चुनाव आयोग के अनुसार कुल 824 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा, लगभग 2.19 लाख पोलिंग स्टेशन बनाए जाएंगे, करीब 25 लाख अधिकारी और कर्मचारी चुनाव ड्यूटी में तैनात रहेंगे।
यह अपने आप में दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक अभ्यासों में से एक होगा। राजनीतिक व्यंग्यकार रूबी अरुण इसे यूं कहती हैं “भारत में चुनाव सिर्फ वोट नहीं होते, यह लोकतंत्र का सबसे बड़ा मैराथन होता है।”
मुख्य चुनाव आयुक्त का भरोसा
मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar ने चुनाव की तैयारियों को लेकर संतोष जताया है। उन्होंने मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने पर चुनाव कर्मचारियों की सराहना भी की। उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी तरीके से कराया जाएगा।
यानी अब गेंद जनता के पाले में है। नेता मंचों पर भाषण देंगे पोस्टर दीवारों पर लगेंगे और आखिर में मतदाता तय करेगा कि सत्ता की कुर्सी किसे मिलेगी।
लोकतंत्र की असली परीक्षा
भारत में चुनाव सिर्फ राजनीतिक प्रक्रिया नहीं हैं। यह जनता और सत्ता के बीच का सबसे बड़ा संवाद है। गांव की गलियों से लेकर महानगरों की सड़कों तक अब आने वाले हफ्तों में पोस्टर, रैलियां, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक व्यंग्य की पूरी आंधी देखने को मिलेगी।
क्योंकि भारत में चुनाव सिर्फ चुनाव नहीं होते। यह एक ऐसा मंच है जहां जनता आखिरी फैसला सुनाती है।
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