आईएएस सिद्धार्थ का इस्तीफा: क्या नीतीश के सचिव चुनाव लड़ेंगे नवादा से?

आलोक सिंह
आलोक सिंह

बिहार की सियासी फिज़ाओं में चुनावी गर्मी बढ़ चुकी है। इस बीच सबसे बड़ा झटका आया सीएम नीतीश कुमार के बेहद करीबी और आईएएस एस. सिद्धार्थ के इस्तीफे से। उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) के लिए आवेदन दिया है और चर्चा ये है कि वे अब नवादा से जेडीयू के टिकट पर विधानसभा चुनाव 2025 लड़ सकते हैं।

हाल ही में उनका नवादा दौरा भी इसी अफवाह को पंख लगा चुका है। दिलचस्प ये है कि सिद्धार्थ पहले से ही एक प्रशिक्षित पायलट हैं – और अब राजनीति की उड़ान भरने को तैयार नजर आ रहे हैं।

पूर्व में कौन-कौन ‘सरकारी कुर्सी’ छोड़ राजनीति में उतरे?

👮‍♂️ गुप्तेश्वर पांडे – DGP से धर्मपथ तक

2020 से पहले वीआरएस लेकर चुनाव लड़े, लेकिन हार मिली। फिर उन्होंने अध्यात्म की राह पकड़ी और चर्चा से दूर हो गए।

शिवदीप लांडे – जनता के चहेते, अब अपने बैनर तले

IPS रहते जनता में सुपरहिट हुए लांडे ने अपनी पार्टी हिंद सेना बनाई है और अब 2025 में मुकाबले को तैयार हैं।

आशीष रंजन – DGP से सांसद बनने की चाह

पहले जेडीयू, फिर कांग्रेस का सहारा लिया, लेकिन नालंदा से लोकसभा हार गए।

डीपी ओझा – पब्लिक फेवरेट लेकिन वोटबॉक्स में फ्लॉप

शहाबुद्दीन से दो-दो हाथ करने वाले डीजीपी रहे ओझा ने बेगूसराय से चुनाव लड़ा, पर नतीजे निराशाजनक रहे।

जेपी सिंह – हिमाचल कैडर, बिहार दिल से

पूर्व ADGP, अब प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ में शामिल होकर सियासी पिच पर उतर चुके हैं।

क्या अफसरशाही से राजनीति की राह आसान है?

बिहार में कई नौकरशाहों ने राजनीति में हाथ आजमाया – कुछ चमके, कुछ गुमनाम हो गए। एस सिद्धार्थ के सामने चुनौती बड़ी है – जनता के दिल तक पहुंचना और बाबूगिरी से नेता बनने का सफर तय करना।

“जो पायलट था, वो अब MLA बनना चाहता है — लगता है प्लेन नहीं, अब पब्लिक उड़ान भराएगी!”

आईएएस अफसरों का चुनावी मोह कोई नई बात नहीं, लेकिन अब सबकी निगाहें एस. सिद्धार्थ पर टिकी हैं — क्या वे भी ‘पब्लिक सर्वेंट’ से ‘पब्लिक लीडर’ बन पाएंगे?

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