अपनी सरकार के खिलाफ Anil Vij! 1500 करोड़ का वर्कस्लिप घोटाला बेनकाब

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

हरियाणा सरकार में सियासी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। अपनी बेबाक बयानबाज़ी के लिए चर्चित कैबिनेट मंत्री अनिल विज (Anil Vij) एक बार फिर सुर्खियों में हैं—इस बार अपनी ही सरकार के खिलाफ।

श्रम मंत्री अनिल विज ने Labour Department में सामने आए कथित ₹1500 करोड़ के वर्कस्लिप (Work Slip) घोटाले की किसी स्वतंत्र और प्रतिष्ठित जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र भी लिखा है।

क्या है वर्कस्लिप घोटाला?

यह मामला हरियाणा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड से जुड़ा है, जहां लंबे समय से फर्जी श्रमिक पंजीकरण। बड़े पैमाने पर अवैध वर्कस्लिप जारी। सरकारी योजनाओं का गलत लाभ दिए जाने की आशंका सामने आई है।

प्रारंभिक जांच में घोटाले का आकार करीब 1500 करोड़ रुपये तक बताया जा रहा है।

‘गांव के गांव फर्जी’, मंत्री विज का दावा

अनिल विज ने खुलासा किया कि कई जगहों पर पूरे गांव के नाम पर फर्जी श्रमिकों का पंजीकरण किया गया और उनके नाम से वर्कस्लिप बनाकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया गया।

“एक श्रमिक को औसतन 2.5 लाख रुपये तक का लाभ मिलता है, ऐसे में सरकार को भारी नुकसान हुआ है।”
— अनिल विज

चौंकाने वाले आंकड़े: सत्यापन में खुली पोल

अब तक 13 जिलों में 100% भौतिक सत्यापन पूरा हो चुका है। आंकड़े बेहद गंभीर हैं:

Work Slip Verification Data

  • कुल जारी वर्कस्लिपें: 5,99,758
  • वैध पाई गईं: 53,249
  • अवैध पाई गईं: 5,46,509

Labour Registration Status

  • कुल पंजीकरण: 2,21,517
  • पात्र श्रमिक: 14,240
  • फर्जी पंजीकरण: 1,93,756

किन जिलों में जांच पूरी?

सत्यापन जिन जिलों में पूरा हो चुका है, उनमें शामिल हैं:

करनाल, रेवाड़ी, नूंह (मेवात), महेंद्रगढ़, गुरुग्राम, झज्जर, पलवल, पानीपत, रोहतक, सोनीपत, पंचकूला, सिरसा और कैथल

श्रमिक कल्याण योजनाएं भी शक के घेरे में

इन फर्जी पंजीकरणों के जरिए जिन योजनाओं का लाभ उठाया गया, उनमें शामिल हैं:

  • मातृत्व लाभ – ₹36,000
  • पितृत्व लाभ – ₹21,000
  • शिक्षा सहायता – ₹8,000 से ₹20,000 सालाना
  • मेरिट स्कॉलरशिप – ₹21,000 से ₹51,000

यानी welfare का पैसा fake welfare में बदल गया।

जब कल्याण योजनाओं में श्रमिक कम और स्लिप ज़्यादा हो जाएं, तो सवाल सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं—निगरानी सिस्टम का भी होता है।

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