
लखनऊ के एक छोटे से घर में रात के 11 बजे भी टीवी बंद नहीं हुआ। रईस अहमद हर आधे घंटे में मोबाइल उठाकर दुबई में काम कर रहे अपने भाई फैज़ का व्हाट्सऐप आखिरी बार चेक करते हैं।”
विदेश में काम कर रहे बच्चों की आवाज़ सुनते ही घरों में राहत की सांस आती है। डर है, लेकिन भरोसा भी है। भरोसा इस बात पर कि Narendra Modi की सरकार अपने नागरिकों को कभी अकेला नहीं छोड़ती।
जंग का साया, घरों में बेचैनी
उत्तर भारत के कई परिवारों की रातें इन दिनों लंबी हो गई हैं। किसी का बेटा दुबई में है, किसी का भाई रियाद में, तो कोई हाल ही में कतर और जद्दा से लौटकर आया है।
गली-मोहल्लों में चर्चा सिर्फ एक ही है अगर युद्ध बढ़ा तो क्या होगा? लेकिन साथ ही एक विश्वास भी बार-बार सुनाई देता है कि भारत सरकार अपने लोगों को सुरक्षित वापस लाने का रास्ता जरूर निकालेगी।

रईस अहमद का परिवार
रईस अहमद का भाई फैज़ दुबई में काम करता है।
रईस कहते हैं, टीवी पर जब भी मिडिल ईस्ट की खबर आती है तो दिल धड़कने लगता है। लेकिन कल ही फैज़ से बात हुई थी, उसने कहा सब ठीक है। उम्मीद है कि सरकार अपने लोगों को सुरक्षित निकालने का रास्ता निकालेगी।
रईस अहमद कहते हैं, “बस दुआ है कि हालात शांत रहें। घर वाले तभी चैन से सो पाएंगे जब फैज़ की फ्लाइट भारत उतर जाएगी।”

अख्तरी बेगम की चिंता
अख्तरी बेगम अस्सी साल की हो चुकी हैं, बेटा शोएब सऊदी अरब की राजधानी Riyadh में नौकरी करता है।
वे कहती हैं, “मां का दिल है, डर तो लगता ही है। लेकिन हमें उम्मीद है कि सरकार अपने नागरिकों का ख्याल रखती है। पहले भी संकट में लोगों को एयरलिफ्ट किया गया था, इस बार भी ऐसा ही होगा।”


आलम के घर की राहत
आलम बताते हैं कि उनका भाई गोलू हाल ही में Qatar से वापस लौटा है। “वह सही समय पर घर आ गया। लेकिन हमारे कई रिश्तेदार अभी भी वहीं हैं। टीवी पर युद्ध की खबरें देखकर डर लगता है, मगर हमें यकीन है कि अगर जरूरत पड़ी तो भारत सरकार उन्हें भी सुरक्षित निकाल लेगी।”

शादाब की कहानी
शादाब अभी कुछ ही दिन पहले Jeddah से लौटे हैं।
वे कहते हैं, “हालात थोड़े तनाव वाले जरूर हैं, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। भारतीय दूतावास लगातार संपर्क में रहता है। और सच कहूं तो हमें भरोसा है कि हमारा देश अपने नागरिकों को कभी मुश्किल में नहीं छोड़ता।”
“शादाब बताते हैं कि भारतीय दूतावास के हेल्पलाइन नंबर लगातार सक्रिय हैं। ‘अगर कोई परेशानी हो तो तुरंत संपर्क करने को कहा गया है।’”
भरोसा सिर्फ परिवारों का नहीं
पिछले एक दशक में कई बार भारत ने विदेशों में फंसे अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया है। इसी वजह से आज भी लोगों के दिल में यह भरोसा है कि संकट चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, भारत अपने नागरिकों को घर लाने के लिए हर संभव कदम उठाएगा।
डर और उम्मीद साथ-साथ
इन परिवारों की कहानी सिर्फ चिंता की नहीं है। यह उस भरोसे की कहानी है जो हजारों किलोमीटर दूर बैठे बच्चों और यहां इंतजार करते परिवारों को जोड़ता है। जंग का डर जरूर है, लेकिन उम्मीद भी उतनी ही मजबूत है कि अंत में हर बेटा और भाई सुरक्षित अपने घर की दहलीज पार करेगा।
खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों का कहना है कि वहां भारतीय दूतावास और स्थानीय प्रशासन दोनों संकट के समय सहयोग करते हैं।
खाड़ी देशों में भारतीयों की संख्या
- UAE: लगभग 35 लाख
- सऊदी अरब: लगभग 26 लाख
- कतर: लगभग 8 लाख
लखनऊ के पुराने मोहल्ले के कई घरों में इन दिनों टीवी चैनलों पर मध्यपूर्व की खबरें लगातार देखी जा रही हैं।
