
दुनियाभर में Jeffrey Epstein Files को लेकर भूचाल आया हुआ है। अमेरिका से लेकर यूरोप तक, हर जगह बड़े नामों पर सवाल उठ रहे हैं।
लेकिन भारत में यह विवाद उस वक्त गरमा गया, जब एक ईमेल रिपोर्ट में दावा किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एपस्टीन से सलाह ली और 2017 की इज़रायल यात्रा के दौरान डोनाल्ड ट्रंप के “फायदे” के लिए कुछ किया।
इस दावे के सामने आते ही राजनीतिक पारा चढ़ा—और अब भारत सरकार की तरफ से दो टूक जवाब आ गया है।
MEA का साफ संदेश: ‘इसे तिरस्कार के साथ खारिज करते हैं’
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस दावे को लेकर बेहद सख्त लहजे में प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री की 2017 की इज़रायल यात्रा एक स्थापित तथ्य है, लेकिन ईमेल में लिखी गई बाकी बातें पूरी तरह बकवास हैं। इन्हें तिरस्कार के साथ खारिज किया जाता है।”
यानी सरकार के मुताबिक, यह मामला फैक्ट नहीं, फैंटेसी है।
विपक्ष ने उठाए सवाल, सरकार ने दिया फुल स्टॉप
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस ईमेल रिपोर्ट को आधार बनाकर सवाल पूछा कि “एपस्टीन से सलाह किस मुद्दे पर ली गई?”
लेकिन MEA के बयान के बाद सरकार का रुख साफ है— कोई सलाह नहीं, कोई कनेक्शन नहीं, कोई सवाल नहीं।
Epstein Files में आखिर है क्या?
आपको बता दें कि जेफ्री एपस्टीन, नाबालिगों के यौन शोषण का कुख्यात आरोपी था। उससे जुड़ी 30 लाख से ज्यादा फाइलें अब सार्वजनिक हो चुकी हैं, जिन्हें Epstein Files Transparency Act के तहत जारी किया गया।

डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांच के मुताबिक, इन दस्तावेज़ों में शामिल हैं, Emails, Call logs, Interview transcripts, Court records
हालांकि कई फाइलें पहले से एडिटेड रूप में पब्लिक डोमेन में थीं।
Trump और Clinton के नाम, लेकिन आरोप नहीं
इन फाइल्स में Donald Trump और Bill Clinton के नाम ज़रूर आए हैं, लेकिन किसी पर नाबालिग शोषण का आरोप साबित नहीं हुआ। दोनों ने कहा कि उन्हें एपस्टीन के अपराधों की कोई जानकारी नहीं थी।
यानी नाम आना और दोषी होना—दो अलग बातें हैं।
आज के दौर में ईमेल लिखना आसान है, हेडलाइन बनाना और आसान लेकिन सच को पकड़ना सबसे मुश्किल।
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