
दिल्ली के द्वारका में एक तेज रफ्तार SUV ने एक ऐसे सपने को कुचल दिया, जो अभी उड़ान भरने की तैयारी में था। 17 साल के नाबालिग द्वारा चलाई जा रही गाड़ी ने साहिल की बाइक को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
साहिल का कमरा आज भी वैसा ही है दीवारों पर लिखे बड़े सपने, “2025 मेरा साल होगा”, “One Million Dollar Goal”, मेज पर रखी किताबें और दर्जनों मेडल। लेकिन एक लापरवाही ने उन तमाम इरादों को हमेशा के लिए खामोश कर दिया।
हादसे की भयावह तस्वीर
चश्मदीदों के मुताबिक टक्कर इतनी भीषण थी कि साहिल करीब 50 फीट तक हवा में उछल गया। हादसे का वीडियो SUV के अंदर से रिकॉर्ड हुआ, जिसमें किशोर ड्राइवर तेज रफ्तार में गाड़ी चलाता दिख रहा है। बस को बचाने की कोशिश में सामने से आ रही बाइक को सीधी टक्कर मार दी गई।
चौंकाने वाली बात यह है कि उसी SUV पर पहले से 13 चालान दर्ज थे, जिनमें 9 ओवरस्पीडिंग के थे। आरोपी के पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था।
मां का दर्द और सिस्टम पर सवाल
3 फरवरी को साहिल की मां को पुलिस का फोन आया। मौके पर पहुंचीं तो बेटा सड़क पर लहूलुहान पड़ा था। उनका आरोप है कि एम्बुलेंस पास खड़ी थी, लेकिन कोई तुरंत अस्पताल ले जाने की पहल नहीं कर रहा था।
मां का कहना है कि काफी कहने के बाद घायल बेटे को बिना गर्दन सपोर्ट के हाथ-पैर पकड़कर ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
उनके शब्दों में “मेरा बेटा तड़पता रहा, लोग देखते रहे।”

अंतरिम जमानत और कानूनी बहस
आरोपी नाबालिग को 10वीं बोर्ड परीक्षा के कारण अंतरिम जमानत मिल गई है। यह फैसला कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है। सवाल सिर्फ एक हादसे का नहीं, बल्कि सिस्टम की निगरानी, ट्रैफिक नियमों के पालन और अभिभावकीय जिम्मेदारी का भी है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक साहिल की मौत अंदरूनी रक्तस्राव से हुई। सिर के बाएं हिस्से में फ्रैक्चर, दिमाग में सूजन और फेफड़ों में गंभीर चोटें पाई गईं। यह रिपोर्ट टक्कर की भयावहता को बयान करती है।
परिवार का दावा है कि वायरल वीडियो को ट्रिम कर दिया गया है, जिससे हादसे की पूरी तस्वीर सामने नहीं आ पा रही।
सड़क पर स्पीड या सिस्टम की स्पीड?
यह मामला सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि रोड सेफ्टी और कानून के क्रियान्वयन पर बड़ा सवाल है। 13 चालान के बावजूद गाड़ी सड़क पर क्यों थी? बिना लाइसेंस नाबालिग ड्राइव कैसे कर रहा था? और हादसे के बाद रेस्क्यू में देरी क्यों हुई?
सड़क पर स्पीड का रोमांच कुछ सेकंड का होता है, लेकिन उसकी कीमत कई जिंदगियां चुकाती हैं।
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