
आज के डिजिटल युग में ‘डिजिटल रेप’ सुनते ही बहुत से लोगों को लगता है कि ये कोई ऑनलाइन यौन अपराध होगा। लेकिन हकीकत इससे एकदम अलग है। यहां ‘डिजिटल’ का मतलब इंटरनेट या सोशल मीडिया नहीं, बल्कि उंगली या वस्तु से किया गया शारीरिक उत्पीड़न है।
इस शब्द की जड़ लैटिन के शब्द “Digitus” में है, जिसका मतलब होता है — उंगली।
डिजिटल रेप: भारतीय कानून में इसकी परिभाषा और गंभीरता
IPC से BNS तक का सफर:
2012 के निर्भया कांड के बाद भारत में यौन अपराध कानूनों में बड़े बदलाव हुए। पहले केवल पेनिस द्वारा वजाइना में प्रवेश को ही रेप माना जाता था, पर 2013 में Criminal Law (Amendment) Act के तहत IPC की धारा 375 को संशोधित किया गया।
अब 2023 में लागू हुई भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत यह परिभाषा और स्पष्ट हुई।
अब किसी महिला के प्राइवेट पार्ट में उंगली या कोई वस्तु बिना सहमति के डालना भी रेप माना जाता है, जिसे आम तौर पर डिजिटल रेप कहा जाता है।
BNS की धारा 63 और 64: कितनी सज़ा होती है डिजिटल रेप में?
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BNS Section 63B: डिजिटल रेप एक गंभीर यौन अपराध है।
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BNS Section 64:
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न्यूनतम सज़ा: 10 साल का कठोर कारावास
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अधिकतम सज़ा: आजीवन कारावास
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यदि पीड़िता 12 साल से कम उम्र की हो:
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न्यूनतम: 20 साल की सज़ा
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अधिकतम: मृत्युदंड तक हो सकता है
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जुर्माने का भी प्रावधान है
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डिजिटल रेप बनाम रेप: क्या है फर्क?
| पैरामीटर | रेप | डिजिटल रेप |
|---|---|---|
| मुख्य तत्व | पेनिस का प्रवेश | उंगली या वस्तु का प्रवेश |
| कानून (अब BNS) | धारा 63A | धारा 63B |
| पूर्व कानून (IPC) | धारा 375 | धारा 354 / 377 (पहले) |
| सज़ा | 10 साल से लेकर मृत्युदंड | 10 साल से लेकर मृत्युदंड |
पुलिस और मेडिकल जांच की चुनौतियां
अक्सर मेडिकल रिपोर्ट में यह कहा जाता है कि प्राइवेट पार्ट में चोट नहीं है। लेकिन क़ानून साफ़ कहता है कि:
“चोट का न होना यौन अपराध को खारिज नहीं करता।”
पुलिस को चाहिए कि वो:
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मेडिकल एग्ज़ामिनेशन तुरंत कराए
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फॉरेंसिक सबूत सुरक्षित रखे
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पीड़िता का बयान संवेदनशीलता से ले
सर्वाइवर पर मानसिक प्रभाव और समाज की भूमिका
वरिष्ठ वकील कामिनी जायसवाल कहती हैं:
“डिजिटल रेप का मानसिक आघात किसी भी रेप जितना ही गहरा होता है। समाज को समझना होगा कि यह ‘कम गंभीर’ नहीं है।”
इसीलिए ज़रूरी है:
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स्कूल और घर में यौन शिक्षा देना
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गुड टच, बैड टच जैसी बातें बच्चों को समझाना
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पीड़िता को गिल्ट फील कराना बंद करना
जागरूकता ही बचाव है: डिजिटल का मतलब इंटरनेट नहीं हर बार
‘डिजिटल रेप’ शब्द से भ्रमित ना हों — यह कोई टेक्नोलॉजी से जुड़ा क्राइम नहीं, बल्कि रियल फिजिकल यौन हिंसा है। हर माता-पिता, शिक्षक और समाज को चाहिए कि इस विषय पर खुलकर बात करें।
‘डिजिटल रेप’ अब क़ानूनन रेप की ही श्रेणी में आता है, और इसकी सज़ा उतनी ही सख़्त है। इसे हल्के में लेना, समझना या नजरअंदाज़ करना सिर्फ अपराधियों को बढ़ावा देना है।
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