“कनॉट प्लेस में भी टोल लगा दोगे?” — SC की फटकार से हिली MCD-NHAI

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

दिल्ली के बॉर्डर पर रोज़ लगने वाला endless traffic jam अब सुप्रीम कोर्ट की नजरों में आ चुका है।  टोल प्लाजा, गाड़ियों की लंबी कतारें और उससे निकलता ज़हर—यानी Pollution + Chaos Combo—को लेकर CJI ने साफ शब्दों में नाराज़गी जताई।

कोर्ट ने कहा कि दिल्ली बॉर्डर पर टोल प्लाजा अब सिर्फ revenue point नहीं, बल्कि public health threat बन चुके हैं।

MCD के 9 Toll Plaza पर अस्थायी ब्रेक?

सुप्रीम कोर्ट ने MCD को निर्देश दिया है कि दिल्ली बॉर्डर पर मौजूद सभी 9 टोल प्लाजा को कुछ समय के लिए सस्पेंड करने पर गंभीरता से विचार किया जाए।
कोर्ट ने साफ कहा— एक हफ्ते में फैसला करो।

जब दिल्ली सांस नहीं ले पा रही, तब टोल मशीनें क्यों पूरी ताकत से चल रही हैं?

NHAI Model: Toll चले, Jam ना हो

SC ने NHAI को एक alternative model पर विचार करने को कहा है— MCD के टोल बूथ को ऐसे स्थानों पर शिफ्ट किया जाए। जहां NHAI संचालन करे और वसूले गए टोल का एक हिस्सा MCD को दे दिया जाए।

यानि— Revenue भी बचे, City भी बचे।

CJI की तीखी टिप्पणी: “कल कनॉट प्लेस में भी टोल लगा दोगे?”

CJI ने सुनवाई के दौरान तीखा सवाल दागा— “क्यों नहीं कोई अधिकारी आगे आकर कहता कि जनवरी तक टोल नहीं वसूला जाएगा? कल को कनॉट प्लेस में भी टोल लगाना शुरू कर दोगे, क्योंकि पैसा चाहिए!”

Judicial sarcasm at its best.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह टोल के खिलाफ नहीं, लेकिन जनहित के खिलाफ टोल को मंज़ूरी नहीं दी जा सकती।

31 जनवरी तक टोल फ्री? SC का संकेत

CJI ने कहा— 31 जनवरी तक टोल न वसूला जाए, इसका रास्ता निकालो। यह बयान साफ संकेत देता है कि कोर्ट temporary relief के मूड में है—खासकर तब, जब दिल्ली पहले ही GRAP IV से जूझ रही है।

GRAP IV में Vehicles को लेकर राहत

प्रदूषण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने BS3 नई मॉडल गाड़ियों को लेकर भी राहत दी है। केंद्र सरकार के अनुरोध पर कोर्ट ने कहा— BS3 के new models पर दंडात्मक कार्रवाई न की जाए, केवल पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्ती जारी रहे।

अगली सुनवाई 6 जनवरी।

Bigger Picture: Jam नहीं, System Fail है

Delhi Border का जाम सिर्फ traffic issue नहीं, बल्कि policy failure का symbol बन चुका है। जब entry point पर bottleneck होगा— तो न हवा बचेगी, न patience, और न ही public trust।

SC का यह intervention साफ बताता है कि अब Urban Governance को reset करने का समय आ चुका है।

Supreme Court का संदेश crystal clear है— Revenue से पहले Respiration जरूरी है। अगर MCD और NHAI ने इस  warning को lightly लिया, तो अगला कदम शायद और ज्यादा सख्त judicial आदेश हो सकता है।

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