
यूनियन बजट 2026-27 में इस बार स्पोर्ट्स सेक्टर को सिर्फ मोटिवेशन नहीं, मैन्युफैक्चरिंग पावर दी गई है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कहा कि “भारत में खेल सामानों का Global Hub बनने की पूरी क्षमता है.”
मतलब अब मैच सिर्फ मैदान में नहीं, फैक्ट्री और एक्सपोर्ट मार्केट में भी खेला जाएगा.
Players को क्या मिलेगा? सिर्फ Medal नहीं, Margin भी
अब तक खेलों में एंट्री का सबसे बड़ा Villain रहा है — महंगा Sports Kit. Lower middle class और middle class परिवारों के बच्चों के लिए जर्सी, बैट, शूज़ और सेफ्टी गियर किसी Luxury Item से कम नहीं थे.
Budget 2026 का फॉर्मूला सीधा है Make in India Sports Goods, Cost कम, Availability ज्यादा, Possible subsidy + tax relief
संदेश साफ है — Talent पैसों की वजह से Bench पर नहीं बैठेगा.
‘खेलो इंडिया’ Mission: अब सिर्फ Event नहीं, Ecosystem
‘खेलो इंडिया’ को इस बार सिर्फ स्कीम नहीं, स्पोर्ट्स इंडस्ट्री की Backbone बनाया जा रहा है.
क्या-क्या बदलेगा?
- Integrated Talent Development Pathway
- Sports Science & Technology का integration
- Coaches और Support Staff का structured development
- Training + Competition Infrastructure upgrade
- Grassroot से League culture को push
यानि अब खिलाड़ी अकेला नहीं लड़ेगा — पूरा सिस्टम उसके साथ खड़ा होगा.
Sports = Jobs, सिर्फ Trophy नहीं
वित्त मंत्री का बयान blunt था:

“Sports sector रोजगार, स्किलिंग और entrepreneurship के बड़े अवसर देता है.”
Budget 2026 का hidden message यही है —
Manufacturing
Supply Chain
Sports Analytics
Media & Event Management
Design & Innovation
अब खेल सिर्फ खेलने वालों के लिए नहीं, करियर ढूंढने वालों के लिए भी है.
अब तक देश में सोच थी — “खेलो, पर पढ़ाई मत छोड़ो.” अब सरकार कह रही है — “खेलो, क्योंकि यही पढ़ाई भी है और कमाई भी.”
अगर ये प्लान जमीन पर उतरा, तो अगला सवाल ये नहीं होगा कि “कोचिंग का खर्च कैसे उठाएं?” बल्कि “India से कौन-सा Sports Brand दुनिया जीतेगा?”
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