BMC चुनाव से पहले निर्विरोध जीतों पर बवाल, SEC की सख्त जांच

Ajay Gupta
Ajay Gupta

महाराष्ट्र में होने वाले BMC चुनावों से पहले सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन (BJP–Shiv Sena–NCP) के कई उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने ने राज्य की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। इन मामलों को गंभीर मानते हुए राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने पूरे घटनाक्रम की औपचारिक जांच के आदेश दे दिए हैं।

SEC को आशंका है कि कहीं विपक्षी उम्मीदवारों पर दबाव, प्रशासनिक पक्षपात या प्रलोभन देकर नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर तो नहीं किया गया। यानी चुनाव से पहले ही “मैच फिक्स” हुआ या नहीं—अब यही बड़ा सवाल है।

रिपोर्ट आने तक परिणाम पर ब्रेक

राज्य चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि जब तक सभी नगर निगमों, जिलों और रिटर्निंग ऑफिसर्स से विस्तृत रिपोर्ट नहीं मिल जाती, तब तक निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा नहीं होगी
SEC का कहना है कि free, fair and transparent elections उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है—और इसमें “मैनेजमेंट” की कोई गुंजाइश नहीं।

किन शहरों में उठा विवाद?

जानकारी के मुताबिक, Pimpri-Chinchwad, Jalgaon और Chhatrapati Sambhajinagar में कम से कम एक-एक BJP उम्मीदवार निर्विरोध चुना गया। Kalyan-Dombivli में BJP के 5 और Shinde-led Shiv Sena के 4 उम्मीदवारों के खिलाफ कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं। इतनी बड़ी संख्या में unopposed wins ने विपक्ष को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि लड़ाई थी ही नहीं या लड़ने ही नहीं दी गई?

Opposition का आरोप: “फॉर्म तक नहीं भरने दिया”

Aam Aadmi Party की नेता रेखा रेडकर ने SEC में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि— “नामांकन के आखिरी दिन मुझे टोकन तक नहीं दिया गया, जबकि BJP उम्मीदवारों को deadline के बाद भी दस्तावेज जमा करने की अनुमति मिली।”

रेडकर ने CCTV फुटेज की मांग की है ताकि यह साबित हो सके कि नियम सबके लिए बराबर नहीं थे। कांग्रेस, JD(S) और AAP के अन्य उम्मीदवारों ने भी इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराई हैं।

कोलाबा वार्ड और स्पीकर पर भी सवाल

मुंबई के Colaba Ward ‘A’ में मामला और गर्म हो गया है। पूर्व सांसद हरिभाऊ राठौड़ ने BJP विधायक और विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर पर आरोप लगाया है कि उन्होंने Returning Officer के साथ मिलकर अन्य उम्मीदवारों को nomination से रोका।
अब SEC ने BMC Commissioner से रिपोर्ट और CCTV फुटेज की जांच के निर्देश दिए हैं।

आगे क्या कार्रवाई संभव?

SEC के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार—

  • 9 वार्डों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाएगी
  • 3 जनवरी के बाद RO, Police Commissioner और BMC Commissioner से जवाब लिया जाएगा
  • नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर Returning Officer पर कार्रवाई संभव है

हालांकि कानून यह भी कहता है कि नए उम्मीदवारों को दोबारा नामांकन की अनुमति नहीं दी जा सकती—यानी गलती हुई तो सज़ा होगी, सुधार नहीं।

लोकतंत्र में वोट डालने से पहले अगर जीत तय हो जाए, तो सवाल सिर्फ विपक्ष का नहीं—पूरे सिस्टम का होता है। अब देखना यह है कि SEC की जांच केवल औपचारिकता बनती है या वाकई चुनावी fairness की लकीर खींचती है।

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