
दक्षिण भारत की राजनीति अक्सर शतरंज की तरह होती है, जहां हर चाल दिखती कम है, असर ज्यादा करती है। इसी बिसात पर भारतीय जनता पार्टी ने केरल और पुडुचेरी के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है।
जहां केरल में यह तीसरी सूची है, वहीं पुडुचेरी में पहली लिस्ट जारी कर पार्टी ने संकेत दे दिया है कि इस बार “फाइट सिर्फ दिखाने के लिए नहीं, जीतने के लिए है।”
केरल: LDF बनाम UDF, बीच में NDA का ‘साइलेंट प्लान’
केरल की राजनीति दशकों से Left Democratic Front और United Democratic Front के बीच झूलती रही है।
मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan तीसरी बार सत्ता में वापसी का सपना देख रहे हैं, जबकि कांग्रेस-नेतृत्व वाला UDF वापसी की बेताबी में है।
लेकिन असली ट्विस्ट यहां है—NDA. भले सीटें कम हों, लेकिन वोट शेयर बढ़ाने का खेल BJP का long-term investment है। यह चुनाव कमल के लिए ‘सरकार’ से ज्यादा ‘जमीन’ की लड़ाई है।
केरल की तीसरी लिस्ट: चेहरे नए, इरादे पुराने
BJP ने कई सीटों पर नए चेहरे उतारे हैं। पेरुमेड, पुथुपल्ली, मावेलिक्करा से लेकर तिरुवनंतपुरम तक पार्टी ने लोकल फैक्टर और caste equation को ध्यान में रखते हुए कैंडिडेट चुने हैं।
यह strategy साफ दिखाती है—“हार भी हो तो हार meaningful होनी चाहिए।”

पुडुचेरी: NDA का ‘कंफर्ट ज़ोन’ या परीक्षा?
पुडुचेरी में फिलहाल NDA गठबंधन की सरकार है। 30 सीटों वाली इस विधानसभा में 16 का आंकड़ा जादुई है। यहां BJP ने 9 उम्मीदवार उतारे हैं और कोशिश यही है कि गठबंधन की सत्ता बरकरार रहे।
बैठक में Narendra Modi, Amit Shah और Rajnath Singh जैसे दिग्गज मौजूद रहे—यानि मैसेज साफ है: “छोटा राज्य, बड़ा फोकस।”
दक्षिण में ‘कमल’ की क्लाइमेट चेंज
केरल में BJP की स्थिति उस खिलाड़ी जैसी है जो मैच जीतने नहीं, गेम बदलने उतरता है। LDF और UDF जहां एक-दूसरे को हराने में लगे हैं, वहीं BJP quietly वोट बैंक में सेंधमारी कर रही है।
पुडुचेरी में मामला थोड़ा अलग है—यहां NDA “डिफेंडिंग चैंपियन” है, लेकिन राजनीति में ट्रॉफी हर बार नई होती है।
क्या कहता है ग्राउंड?
- केरल: tough fight, BJP का gradual rise
- पुडुचेरी: NDA की मजबूत पकड़, लेकिन anti-incumbency का रिस्क
- national leadership का full involvement
यह चुनाव सिर्फ सीटों का नहीं, narrative का भी है।
