
“NDA टूटी, कुर्सी छूटी?” — पारस जी की राजनीतिक खिचड़ी में नया तड़का
बिहार की राजनीति में इन दिनों जितनी गर्मी मौसम में नहीं है, उससे ज़्यादा सियासी बयानबाज़ी में है। RLJP अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस ने सोमवार को वो कह दिया, जिससे NDA की नींद उड़ सकती है — “NDA आने वाले चुनाव तक बिखर जाएगा।”
अब ये कहावत तो आपने सुनी ही होगी — “जब गठबंधन साथ न दे, तो भविष्यवाणी ही हथियार है।”
“हम अब महागठबंधन में विधिवत हैं!” — पारस जी की आधिकारिक घरवापसी
वोटर अधिकार यात्रा में RLJP की गैरहाज़िरी से अटकलें थीं कि शायद NDA के दरवाज़े खुले हैं। लेकिन पारस जी ने साफ़ कर दिया –
“अब हम महागठबंधन में विधिवत शामिल हैं, और हर कार्यक्रम में भागीदारी रहेगी।”
मतलब अब ‘पासवान वोट बैंक’ फिर से पुरानी जगह पार्क हो चुका है।
सीट नहीं, जीत चाहिए! – पारस पासवान का ‘राजनीतिक गणित’
पारस जी का कहना है –“सीटें कितनी मिली, ये नहीं; जितनी जीती, वो देखो।”
वाह सर! अब गठबंधन वाले सोच रहे होंगे कि “अरे भैया, अगर जीत की गारंटी हो तो सीट क्यों न दें, लेकिन गारंटी तो सिर्फ AC और मोबाइल में मिलती है।”

15 से 20 सितंबर तक सीट बंटवारा? या कुर्सी का बंटाधार?
पारस पासवान ने कहा कि महागठबंधन में सीट शेयरिंग पर बातचीत जारी है और 15 से 20 सितम्बर तक इसका ऐलान हो जाएगा। लेकिन बिहार में राजनीति का नियम है – घोषणा भले हो, फाइनल तब ही जब पोस्टर छपे और जुलूस निकले।
NDA में टूट की भविष्यवाणी — ‘नेताजी’ या ‘नवज्योत’?
NDA के टूटने की भविष्यवाणी कुछ वैसी ही लग रही है जैसे क्रिकेट में “अभी रन रेट थोड़ा तेज़ करना पड़ेगा” – मतलब नतीजा सामने हो या न हो, बोलना ज़रूरी है। हो सकता है पारस जी के पास कोई गुप्त सूत्र हो… या फिर गुप्त गुस्सा?
गठबंधन टूटे या जुड़े, बिहार की जनता पूछ रही है — “हमें क्या मिलेगा?”
राजनीतिक गठबंधनों की शादियाँ अब “Netflix के रिश्तों” जैसी हो गई हैं – सीज़न आता है, प्यार दिखता है, फिर ड्रामा होता है और अगली बार नया चेहरा होता है।
जनता पूछ रही है – “सीटें आपस में बांट लो, पर हमारे मुद्दों का क्या?”
“मेरे पास 40 एकड़ है” – खड़गे बोले, किसान रोया, BJP ने ट्वीट किया!
