
फरवरी 2026 के आम चुनावों में Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर इतिहास रच दिया है। पार्टी प्रमुख Tarique Rahman अब देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने की तैयारी में हैं। ढाका की सियासत में यह बदलाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि विदेश नीति के नए अध्याय की शुरुआत भी माना जा रहा है।
भारत के साथ ‘New Beginning’ का संकेत
BNP ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह भारत के साथ संबंधों को “रीसेट” करना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक, शपथ ग्रहण समारोह में भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को आमंत्रित करने पर विचार हो रहा है। इतना ही नहीं, पार्टी क्षेत्रीय देशों के राष्ट्राध्यक्षों को भी बुलाने की रणनीति बना रही है एक तरह से South Asia diplomacy का बड़ा मंच तैयार हो सकता है।
हुमायूं कबीर का बयान: पुरानी धारणाएं बदलने का समय
तारिक रहमान के विदेशी मामलों के सलाहकार Humayun Kabir ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अब दोनों देशों को अतीत की शंकाओं से आगे बढ़ना चाहिए। उनके मुताबिक, यदि भारत ‘Neighbourhood First’ नीति के तहत सम्मानजनक और संतुलित व्यवहार करता है, तो विकास, व्यापार और कनेक्टिविटी के नए रास्ते खुल सकते हैं।
शेख हसीना पर सख्त रुख
BNP ने पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी ने भारत से अपील की है कि वह उन्हें अपनी जमीन पर पनाह न दे। यह बयान राजनीतिक हलकों में बहस का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा तय कर सकता है।

क्या बदलेंगे दक्षिण एशिया के समीकरण?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ सरकार बदलने की कहानी नहीं है। यह South Asian geopolitics के नए समीकरणों का संकेत भी हो सकता है। व्यापार, सीमा सुरक्षा, नदी जल बंटवारा और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर नई सरकार का रुख बेहद अहम होगा।
BNP की जीत के साथ ढाका से एक मैसेज साफ है, “नई सरकार, नई रणनीति।” अब नजरें इस पर हैं कि दिल्ली इस ‘नई शुरुआत’ के प्रस्ताव को किस तरह लेती है।
नया PMO, नए सिग्नेचर… और सीधा जनता की हो गई बल्ले-बल्ले
