बांदा POCSO केस में ऐतिहासिक फैसला: जेई रामभवन और पत्नी को फांसी

अजमल शाह
अजमल शाह

Banda की विशेष अदालत ने बहुचर्चित POCSO मामले में सिंचाई विभाग के जेई रामभवन और उसकी पत्नी को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने 160 पन्नों के विस्तृत फैसले में इस अपराध को “अत्यंत जघन्य और अमानवीय” बताते हुए कहा कि ऐसे कृत्य समाज की मूल आत्मा को आहत करते हैं।

CBI जांच और इंटरपोल इनपुट

मामले की जांच Central Bureau of Investigation ने की। अक्टूबर 2020 में इंटरपोल से मिले इनपुट के बाद कार्रवाई शुरू हुई।

गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों के घर से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए, जिनमें कथित तौर पर 34 बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक वीडियो और सैकड़ों तस्वीरें मिलीं। फरवरी 2021 में चार्जशीट दाखिल की गई और 74 गवाहों के बयान अदालत में पेश किए गए।

कोर्ट का फैसला और मुआवजा

सभी साक्ष्यों पर विचार करते हुए अदालत ने दोनों आरोपियों को मृत्युदंड सुनाया। साथ ही सरकार को निर्देश दिया गया कि पीड़ित बच्चों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।

फैसले में स्पष्ट किया गया कि यह अपराध न केवल कानून, बल्कि मानवता के विरुद्ध है।

समाज के लिए चेतावनी

यह मामला केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं, बल्कि child safety और digital vigilance पर गंभीर सवाल भी उठाता है। जब अपराध तकनीक के जरिए सीमाओं के पार पहुंचता है, तब जांच एजेंसियों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका निर्णायक हो जाती है।

कुछ अपराध इतने भयावह होते हैं कि शब्द भी संकोच करने लगते हैं। यह फैसला सख्त जरूर है, लेकिन अदालत का संदेश साफ है मासूमियत के खिलाफ अपराध पर शून्य सहनशीलता। कानून की किताब में यह पन्ना शायद लंबे समय तक मिसाल बना रहेगा।

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