
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के रामगांव में पुलिस हिरासत में लाए गए आरोपी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है।
रामगोपाल नामक व्यक्ति को नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में Uttar Pradesh Police की रामगांव थाना पुलिस पूछताछ के लिए लेकर आई थी। कुछ ही घंटों में खबर आई उसकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का आरोप: “बेरहमी से पीटा गया”
मृतक के परिवार का सीधा आरोप है कि थाने में पुलिस द्वारा की गई मारपीट से रामगोपाल की हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। घर में मातम है, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बेटे, भतीजों और बहन ने बयान में कहा कि “पूछताछ” की जगह “पिटाई” हुई। सवाल यह है सच्चाई पोस्टमार्टम बताएगा या फिर बयानबाज़ी में दब जाएगी?
पुलिस का पक्ष: “पूछताछ के दौरान हालत बिगड़ी”
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से सामान्य पूछताछ की जा रही थी। इसी दौरान उसकी तबीयत खराब हुई। परिजनों को सूचना देकर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित किया।
पुलिस अधीक्षक RN Singh के निर्देश पर थाना अध्यक्ष Guru Sen Singh, सिपाही पवन यादव समेत अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
यह कदम प्रशासनिक सतर्कता है या बढ़ते दबाव का नतीजा यह भी जांच का हिस्सा बनेगा।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी नजर
शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या कथित मारपीट से। कस्टोडियल डेथ के मामलों में अक्सर रिपोर्ट ही निर्णायक दस्तावेज बनती है और कई बार वही सबसे ज्यादा विवादित भी।
कानून की रखवाली या कानून से टकराव?
जब आरोपी थाने में हो, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी राज्य की होती है। अगर पूछताछ के दौरान मौत होती है, तो सवाल सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, पूरी व्यवस्था की जवाबदेही पर उठता है।
दुष्कर्म का आरोप गंभीर है लेकिन क्या कानून का पालन करने वाली एजेंसी खुद कानून के दायरे में है? इस केस में सच्चाई अदालत और मेडिकल रिपोर्ट तय करेगी। लेकिन भरोसा वह जनता तय करेगी।
मामला अब सिर्फ एक थाने तक सीमित नहीं रहा यह कानून, जवाबदेही और पुलिसिंग मॉडल पर व्यापक बहस की ओर इशारा करता है।
“एयरस्ट्राइक से आग, सीमा पर बारूद: पड़ोसी फिर आमने-सामने!”
