
विधान परिषद सदस्य कुंवर अक्षय प्रताप सिंह ‘गोपालजी’ और उनके सहयोगियों को दिल्ली की MP-MLA कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
दिल्ली पुलिस की Economic Offences Wing (EOW) ने उनके खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है।
सरल शब्दों में आरोप थे, लेकिन अपराध साबित नहीं हुआ।
EOW की जांच में क्या निकला?
EOW ने कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट में साफ कहा है कि आरोपियों के खिलाफ Forgery या Fraud से जुड़े ठोस सबूत नहीं मिले। डिजिटल सिग्नेचर और कंपनी डॉक्यूमेंट्स की तकनीकी जांच में आपराधिक मंशा साबित नहीं हुई। यानी मामला कानूनी शक से आगे नहीं बढ़ पाया।
पूरा विवाद क्या था?
फरवरी 2023 में कुंडा विधायक राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह ने EOW में FIR दर्ज कराई थी। आरोप था कि उनकी कंपनी
‘Shri Da Properties Pvt Ltd’ में फर्जी डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल अवैध शेयर ट्रांसफर कंपनी पर कब्जे की साजिश की गई।
किन धाराओं में केस दर्ज हुआ था?
इस केस में IPC की बेहद गंभीर धाराएं लगाई गई थीं, 420 – धोखाधड़ी, 467, 468, 471 – जालसाजी, 120B – आपराधिक साजिश।
नामजद आरोपियों में शामिल थे अक्षय प्रताप सिंह, अनिल कुमार सिंह, इंद्रदेव पटेल, उमेश कुमार निगम, हरिओम शंकर, रामदेव यादव और अरुण रस्तोगी।

किसे मिली क्लीन चिट?
EOW की क्लोजर रिपोर्ट के बाद इन सभी को कानूनी तौर पर बड़ी राहत मिली है। जांच एजेंसी ने माना कि “संदेह था, लेकिन अपराध का आधार नहीं।”
राजनीतिक गलियारों में इसे “आरोपों की राजनीति, जांच में हार” के रूप में देखा जा रहा है।
यह केस बताता है कि हर FIR सजा तक नहीं पहुंचती। और हर आरोप सच्चाई नहीं होता। कानून ने अपना काम किया सबूत बोले, शोर नहीं।
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