
देश की आध्यात्मिक राजधानी काशी एक बार फिर साक्षी बनी — राजनीति से ऊपर उठकर श्रद्धा और स्मृतियों के संगम की। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे दिवंगत Ajit Pawar की अस्थियों का शुक्रवार को अस्सीघाट पर वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ विसर्जन किया गया। गंगा तट पर मौजूद हर चेहरा एक ही भाव कह रहा था — यह सिर्फ विदाई नहीं, एक युग को नमन है।
जब गंगा ने सहेजी एक राजनीतिक विरासत
सुबह से ही अस्सीघाट पर माहौल अलग था। मंत्रोच्चार की गूंज, दीपों की पंक्तियां और मौन में डूबी आंखें — सब कुछ बता रहा था कि यह कोई सामान्य धार्मिक अनुष्ठान नहीं।
Ajit Pawar की अस्थियों का विसर्जन, महाराष्ट्र से काशी तक फैले उस जनविश्वास का प्रतीक बना, जो उन्हें केवल एक नेता नहीं, बल्कि जनसेवा का चेहरा मानता था।
“Ajit Dada सिर्फ नेता नहीं, विचार थे” — Dhananjay Sharma
इस अवसर पर NCP (Ajit Pawar गुट) के राष्ट्रीय सचिव धनंजय शर्मा भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, “Ajit Dada Pawar राजनीति का शोर नहीं, बल्कि ज़मीन से जुड़ी सेवा का नाम थे। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और राष्ट्रहित के प्रति अटूट निष्ठा का जीवंत उदाहरण है।”
उन्होंने आगे कहा कि काशी की गंगा में अस्थि विसर्जन सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि उस विचारधारा को प्रणाम है, जिसने अंतिम सांस तक आमजन की पीड़ा को प्राथमिकता दी।
Maharashtra से Kashi तक भावनाओं की यात्रा
अस्थि कलश महाराष्ट्र से लेकर काशी तक राष्ट्रीय युवा नेता Arun Dubey द्वारा लाया गया। गंगा में विधिवत विसर्जन की प्रक्रिया पूरे विधि-विधान और शास्त्रीय परंपराओं के साथ संपन्न हुई।
कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष Dheeraj Sharma के नेतृत्व में हुआ, जबकि प्रदेश अध्यक्ष Harish Chandra Singh, महासचिव कामिनी शर्मा की उपस्थिति ने आयोजन को और गरिमा दी।

गंगा आरती में मौन, आंखों में श्रद्धा
शाम को अस्सीघाट पर आयोजित गंगा आरती के दौरान दृश्य और भी भावुक हो गया। हजारों श्रद्धालुओं, कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने दो मिनट का मौन रखकर Ajit Pawar की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
पूरा घाट एक स्वर में जैसे कह रहा था “दादा अमर रहें।”
राजनीति से परे, एक मानवीय पहचान
Ajit Pawar को उनके समर्थक निर्णय लेने की क्षमता, प्रशासनिक समझ और जनता से सीधा संवाद के लिए याद करते हैं।
उनकी राजनीति हमेशा कैमरों के लिए नहीं, बल्कि जमीनी समस्याओं के समाधान के इर्द-गिर्द घूमती रही।

यही कारण है कि काशी में यह आयोजन किसी पार्टी तक सीमित नहीं रहा यह एक व्यक्ति की नहीं, एक सोच की विदाई थी।
क्यों खास है Assi Ghat?
अस्सीघाट केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना का जीवंत केंद्र है। यहां अंतिम संस्कार या अस्थि विसर्जन का अर्थ होता है जीवन के कर्मों को गंगा के प्रवाह में सौंप देना।
Ajit Pawar की अस्थियों का यहां विसर्जन, उनके जीवन की उस यात्रा का प्रतीक बन गया, जो सत्ता से नहीं, सेवा से परिभाषित थी।
मौजूद रहे ये प्रमुख चेहरे
इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में
- Anil Tripathi
- Murli Manohar Pandey
- Mohd Haseen
- Kalika Dubey
सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, पदाधिकारी और श्रद्धालु उपस्थित रहे। हर किसी की आंखों में एक ही भाव — सम्मान।
गंगा में विलीन हुआ शरीर, विचार रहेंगे जीवित
Ajit Pawar अब पंचतत्व में विलीन हो चुके हैं, लेकिन उनका संघर्ष, उनकी राजनीति और उनकी जनसेवा वो गंगा की तरह बहती रहेंगी।
काशी ने उन्हें विदाई नहीं दी, काशी ने उन्हें इतिहास में दर्ज किया।
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