“एयरस्ट्राइक से आग, सीमा पर बारूद: पड़ोसी फिर आमने-सामने!”

राघवेन्द्र मिश्रा
राघवेन्द्र मिश्रा

Pakistan द्वारा अफगान सीमा के भीतर की गई एयरस्ट्राइक ने पूरे क्षेत्र का तापमान बढ़ा दिया है। जवाब में Taliban के प्रवक्ता Zabihullah Mujahid ने सख्त लहजे में कहा कि “इस हरकत का जवाब सैन्य होगा।”

डिटेल्स भले गोपनीय रखी गई हों, लेकिन संदेश साफ है काबुल इसे संप्रभुता पर सीधा वार मान रहा है।

पाकिस्तान का दावा: टारगेट थे आतंकी कैंप

इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए Attaullah Tarar ने कहा कि ऑपरेशन खुफिया इनपुट पर आधारित था और इसमें TTP सहित सात ठिकानों को निशाना बनाया गया।

पाकिस्तानी पक्ष का आरोप है कि रमज़ान के बाद हुए कई हमलों के तार अफगान जमीन से जुड़े हैं। यानी इस स्ट्राइक को “pre-emptive security action” के तौर पर पेश किया जा रहा है।

नागरिक मौतों पर संग्राम

यहीं से नैरेटिव वॉर शुरू होता है। तालिबान का आरोप है कि नंगरहार और पक्तिका में रिहायशी इलाकों व स्कूलों को नुकसान पहुंचा। महिलाओं और बच्चों की मौत का दावा किया गया है।

दूसरी तरफ पाकिस्तान कह रहा है “सिर्फ आतंकी ठिकाने तबाह हुए।”

युद्ध में पहली casualty अक्सर सच होता है… और फिलहाल दोनों तरफ अपने-अपने सच हैं।

सीमा पर सीधी भिड़ंत

हवाई हमलों के बाद हालात ज़मीन पर भी बिगड़ गए। तोरखम जैसे इलाकों में गोलीबारी की खबरें आईं। दोनों देश एक-दूसरे पर पहले फायरिंग शुरू करने का आरोप लगा रहे हैं।

2600 किमी लंबी सीमा पर पहले से नाजुक शांति समझौता अब बारूद के ढेर पर बैठा दिख रहा है। Border villages में रहने वाले आम लोग सबसे ज्यादा असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

Regional Stability पर असर

South Asia पहले ही कई भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रहा है। ऐसे में Afghanistan-Pakistan friction न सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों को बल्कि व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को भी प्रभावित कर सकता है।

Strategic observers मानते हैं कि अगर escalation जारी रही, तो refugee movement, cross-border militancy और diplomatic isolation जैसे मुद्दे और जटिल हो सकते हैं।

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