हवाई सफर की सुरक्षा पर बड़ा सवाल! 76.8% पायलटों को उड़ान के दौरान आई नींद, स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

यूरोपियन कॉकपिट एसोसिएशन (ECA) की एक नई स्टडी में पायलटों की थकान और उड़ान के दौरान नींद आने को लेकर अहम खुलासा हुआ है। अध्ययन के मुताबिक, सर्वे में शामिल 7,200 पायलटों में से 76.8 प्रतिशत ने बताया कि वे पिछले चार सप्ताह के दौरान कम से कम एक बार विमान के नियंत्रण में रहते हुए सो गए थे। इस रिपोर्ट ने विमानन क्षेत्र में पायलटों के आराम, काम के दबाव और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है।

क्या है माइक्रोस्लीप, उड़ान के दौरान क्यों बढ़ता है खतरा

रिपोर्ट में उड़ान के दौरान कुछ पल के लिए अनजाने में सो जाने की स्थिति को माइक्रोस्लीप बताया गया है। नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, यह कुछ सेकंड तक रहने वाली अनैच्छिक नींद है, जिसका एहसास व्यक्ति को खुद भी नहीं हो पाता। इस दौरान व्यक्ति जागता हुआ दिखाई दे सकता है और उसकी आंखें खुली भी रह सकती हैं, लेकिन उसका मस्तिष्क आसपास से मिल रही जानकारी को ठीक से समझने और उस पर प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो सकता है।

नींद की कमी और लगातार थकान माइक्रोस्लीप के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। विमान उड़ाते समय ऐसी स्थिति पैदा होना विशेष रूप से जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि पायलट को लगातार सतर्क रहकर विमान की स्थिति पर नजर रखनी होती है और जरूरत पड़ने पर तुरंत फैसला लेना होता है।

38.8 प्रतिशत पायलटों को पर्याप्त आराम नहीं मिलने की शिकायत

स्टडी के मुताबिक, पायलटों की थकान के पीछे पर्याप्त आराम नहीं मिल पाना एक बड़ी वजह है। सर्वे में शामिल 38.8 प्रतिशत पायलटों ने बताया कि उन्हें अक्सर या हमेशा पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। इससे लगातार थकान बनी रहने और उड़ान के दौरान नींद आने का खतरा बढ़ सकता है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि केवल 37.2 प्रतिशत पायलटों ने कहा कि अस्वस्थ या थका हुआ महसूस करने पर वे इसकी जानकारी देते हैं। इसके उलट, 24.2 प्रतिशत पायलटों ने स्वीकार किया कि वे अपनी परेशानी की सूचना नहीं देते और इसके बावजूद उड़ान भरते हैं। इन पायलटों ने इसकी वजह सजा मिलने या प्रबंधन की नाराजगी का डर बताया।

कमांडर के विवेकाधिकार को लेकर भी उठे सवाल

अध्ययन में कमांडर के विवेकाधिकार के इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई गई है। इस व्यवस्था के तहत विमान के मुख्य पायलट को निर्धारित परिस्थितियों में उड़ान ड्यूटी की अवधि बढ़ाने या जरूरी आराम के समय में कटौती करने की अनुमति मिल सकती है।

सर्वे में शामिल 38.3 प्रतिशत पायलटों ने बताया कि उन्होंने पिछले एक महीने में कम से कम एक बार इस अधिकार का इस्तेमाल किया। वहीं, 15.2 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने दो या उससे अधिक बार ऐसा किया। इसके अलावा, 69.1 प्रतिशत पायलटों ने आशंका जताई कि यदि वे ड्यूटी की समय-सीमा बढ़ाने से इनकार करते हैं, तो उन्हें इसके नकारात्मक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

विमानन सुरक्षा एजेंसी ने एयरलाइनों से क्या कहा

यूरोपीय संघ विमानन सुरक्षा एजेंसी (EASA) ने इन निष्कर्षों को गंभीरता से लेने की बात कही है। एजेंसी ने एयरलाइनों से अपील की कि वे पायलटों की थकान से जुड़े जोखिमों की पहचान करें और उन्हें नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाएं।

एजेंसी के मुताबिक, सटीक रिपोर्टिंग व्यवस्था, परिचालन से जुड़े उचित उपाय और ऐसा सुरक्षित कार्य वातावरण जरूरी है, जहां चालक दल के सदस्य किसी तरह की सजा या प्रतिकूल कार्रवाई के डर के बिना अपनी परेशानी बता सकें। इससे थकान से जुड़े जोखिमों को समय रहते पहचानने और विमानन सुरक्षा को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

2022 में विमान के दोनों पायलट सो गए थे

रिपोर्ट में वर्ष 2022 की एक घटना का भी जिक्र है, जब इथियोपियन एयरलाइंस के बोइंग 737 विमान को उड़ा रहे दोनों पायलट कथित तौर पर नियंत्रण संभालते समय सो गए थे। इस वजह से विमान निर्धारित समय पर लैंडिंग नहीं कर पाया। विमानन विश्लेषक एलेक्स माचेरास ने उड़ान के दौरान पायलटों के सो जाने की घटनाओं को बेहद चिंताजनक बताया और इसके लिए पायलटों की थकान को जिम्मेदार ठहराया।

पायलटों की कमी से बढ़ सकता है काम का दबाव

यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब विमानन उद्योग में पायलटों की उपलब्धता और उनकी मांग के बीच अंतर को लेकर चिंता जताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल पायलटों की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर चरम पर पहुंचने की आशंका है। अनुमान है कि इससे करीब 24,000 पायलटों की कमी हो सकती है।

पायलटों की कमी, काम के लंबे घंटे और पर्याप्त आराम नहीं मिलने जैसी चुनौतियां विमानन क्षेत्र के लिए अहम मुद्दे बनी हुई हैं। हालांकि, अध्ययन में सामने आए आंकड़े सर्वे में शामिल पायलटों के अनुभवों पर आधारित हैं। ये आंकड़े अपने आप में यह साबित नहीं करते कि अधिकांश उड़ानों में यात्रियों की सुरक्षा खतरे में है, लेकिन पायलटों की थकान को गंभीरता से लेने और सुरक्षा नियमों के प्रभावी पालन की जरूरत जरूर रेखांकित करते हैं।

Related posts