नई दिल्ली: परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने कांग्रेस को बातचीत के लिए कई बार आमंत्रित किया, लेकिन पार्टी चर्चा के लिए आगे नहीं आई। रिजिजू के मुताबिक, समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दल सरकार के साथ बातचीत कर चुके हैं और अपनी चिंताएं भी रख चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि जब अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और दूसरे विपक्षी दल सरकार से बात कर सकते हैं, तो कांग्रेस ऐसा क्यों नहीं कर रही है।
कांग्रेस को 10 से ज्यादा बार बातचीत के लिए बुलाया: रिजिजू
हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में किरेन रिजिजू ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को तीन पत्र लिखे हैं। इसके अलावा, वह कई बार उनसे बातचीत भी कर चुके हैं। रिजिजू ने दावा किया कि उन्होंने राहुल गांधी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उन्हें चर्चा में शामिल होने का न्योता दिया था।
संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि उनके संसदीय जीवन में यह पहला मौका है, जब सरकार मुख्य विपक्षी दल को बातचीत के लिए आमंत्रित कर रही है, लेकिन वह चर्चा के लिए तैयार नहीं दिख रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब समाजवादी पार्टी, डीएमके, वाईएसआरसीपी, शिवसेना (यूबीटी) और शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जैसे दल सरकार के साथ बातचीत कर सकते हैं, तो कांग्रेस क्यों पीछे हट रही है।
रिजिजू ने कहा कि सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला सरकार को करना है। फिलहाल अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ बातचीत की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस संसद की कार्यवाही को अपनी शर्तों और योजना के मुताबिक चलाना चाहती है।
परिसीमन पर विपक्ष की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
परिसीमन को लेकर विपक्षी दलों की प्रमुख चिंता लोकसभा में राज्यों के प्रतिनिधित्व से जुड़ी है। रिजिजू के मुताबिक, बीजू जनता दल, डीएमके और समाजवादी पार्टी समेत कई दलों ने मांग रखी है कि परिसीमन की प्रक्रिया में सभी राज्यों को समान रूप से लाभ मिलना चाहिए। किसी भी राज्य की लोकसभा सीटों का मौजूदा आनुपातिक हिस्सा कम नहीं होना चाहिए।
रिजिजू ने कहा कि सरकार ने दूसरे दलों के साथ बातचीत में भरोसा दिलाया है कि किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी और सभी राज्यों को आनुपातिक रूप से सीटों का लाभ मिलेगा। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या इस आश्वासन को विधेयक में शामिल करने की विपक्ष की मांग स्वीकार की जाएगी, तो उन्होंने इस पर विस्तार से टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
विपक्ष के कुछ नेताओं ने यह सुझाव भी दिया है कि महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को परिसीमन से अलग रखा जाए और मौजूदा लोकसभा सीटों के आधार पर ही आरक्षण लागू किया जाए। रिजिजू ने इस मांग पर कोई स्पष्ट रुख नहीं बताया। उन्होंने दोहराया कि सरकार की प्रतिबद्धता किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं करने की है।
संसद का मानसून सत्र खत्म नहीं होने पर क्या बोले रिजिजू?
संसद के मानसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान नहीं किए जाने के सवाल पर रिजिजू ने कहा कि संविधान में सत्रावसान के लिए कोई निश्चित समयसीमा निर्धारित नहीं है। उन्होंने बताया कि आम तौर पर सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद सत्रावसान किया जाता है।
हालांकि, यदि सरकार को लगता है कि सदन की दोबारा बैठक बुलाने की जरूरत पड़ सकती है, तो सत्र को खुला रखा जा सकता है। रिजिजू के अनुसार, पहले भी ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जब एक सत्र से दूसरे सत्र के बीच औपचारिक सत्रावसान नहीं किया गया और अगली बैठक की तारीख घोषित कर दी गई।
विपक्षी नेताओं ने आशंका जताई थी कि सत्रावसान नहीं किए जाने का संबंध संविधान संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक को पेश करने के लिए विशेष सत्र बुलाने से हो सकता है। रिजिजू ने इस आशंका को खारिज करते हुए कहा कि सत्रावसान नहीं होना अपने आप में किसी विशेष योजना का संकेत नहीं है। उन्होंने इसे संसदीय नियमों का उल्लंघन मानने से भी इनकार किया।
1971 के बाद बढ़ी आबादी, लोकसभा में सीटें बढ़ाना जरूरी: रिजिजू
महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन में विपक्ष से अपील किए जाने के सवाल पर रिजिजू ने कहा कि पिछले सत्र में इस विधेयक को पारित करने और महिलाओं को आरक्षण देने की जरूरत पर चर्चा हो चुकी है।
उन्होंने तर्क दिया कि 1971 में हुए पिछले परिसीमन के बाद देश की आबादी में काफी वृद्धि हुई है। ऐसे में लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। उनके मुताबिक, महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
रिजिजू ने कांग्रेस पर विधेयक को रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह समय की जरूरत है, लेकिन आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी दलों समेत कुछ विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ खड़ी हैं।
राहुल गांधी के प्रभाव को लेकर खरगे पर भी टिप्पणी
साक्षात्कार के दौरान रिजिजू से उस दावे के बारे में भी सवाल किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि मल्लिकार्जुन खरगे ने निजी बातचीत में संकेत दिया था कि कांग्रेस का कड़ा रुख राहुल गांधी के प्रभाव में तय हो रहा है।
इस पर रिजिजू ने कहा कि उन्होंने सभी नेताओं से बातचीत की है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी के प्रभाव से बाहर आने पर खरगे इस मुद्दे पर सरकार के रुख से ज्यादा सहमत हो सकते हैं। रिजिजू ने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि यदि वह इस मुद्दे को गंभीरता से समझते, तो इसका विरोध नहीं करते।
चुनावी हार के बाद वोट चोरी का मुद्दा उठा रही कांग्रेस: रिजिजू
वोट चोरी के आरोपों और विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी रिजिजू ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस बार-बार चुनावी हार से ध्यान हटाने के लिए इन मुद्दों को उठाती है। उन्होंने इसे पार्टी की हताशा बताते हुए वोट चोरी के आरोपों को निराधार करार दिया।
युवा प्रदर्शनकारियों के बारे में पूछे जाने पर रिजिजू ने कहा कि प्रदर्शन करने वाले सभी लोगों को देश के युवाओं का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक, प्रदर्शन में राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई), आम आदमी पार्टी और अति वामपंथी समूहों से जुड़े कार्यकर्ता शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार अपने कार्यक्रमों के जरिए युवाओं तक यह संदेश पहुंचाना चाहती है कि भारत में लोकतंत्र वोट और मतपत्र से चलता है, गोलियों से नहीं। रिजिजू ने कहा कि सरकार का विश्वास है कि सत्ता जनता के मतों से हासिल होती है।
मणिपुर में शांति बहाली के लिए सरकार कर रही प्रयास
मणिपुर के हालात पर रिजिजू ने कहा कि वहां जो कुछ हो रहा है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने बताया कि सरकार शांति बहाल करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने राज्य की स्थिति को समुदायों के बीच संघर्ष से जुड़ा मामला बताते हुए उम्मीद जताई कि जल्द ही हालात सामान्य हो जाएंगे।
